नई दिल्ली — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय मीडिया सम्मेलन (IMC) में अपने भाषण के माध्यम से साइबर धोखाधड़ी, डीपफेक मैन्युपुलेशन और अन्य डिजिटल अपराधों को नियंत्रित करने के लिए एक समन्वित वैश्विक ढांचे की मांग की। उन्होंने भारत के डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के तेजी से विकास पर प्रकाश डाला और चेतावनी दी कि अनियंत्रित साइबर खतरों से आर्थिक विश्वास और जन-विश्वास को नुकसान पहुंच सकता है।
बढ़ते साइबर खतरों के लिए समन्वित प्रतिक्रिया की आवश्यकता
प्रधानमंत्री मोदी ने उल्लेख किया कि भारत में ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में वृद्धि देखी गई है, जहां राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार 2026 के पहले छह महीनों में साइबर-संबंधी शिकायतों में 27% की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने हाल के डीपफेक वीडियो का हवाला दिया, जिन्हें कई देशों में चुनावों के दौरान गलत सूचना फैलाने के लिए उपयोग किया गया है, और उन्हें “लोकतंत्रों को अस्थिर करने के लिए एक नया हथियार” बताया। हालांकि, भाषण में शब्दशः उद्धरण शामिल नहीं थे, लेकिन कई मीडिया संस्थानों ने उनके बयानों को दर्ज किया, जिसमें उन्होंने देशों से आम परिभाषाओं को अपनाने, फोरेंसिक टूल्स साझा करने और सीमा पार जांच के लिए त्वरित प्रतिक्रिया टीमों की स्थापना करने की अपील की।
अपने बयान में, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की अपनी साइबर-सुरक्षा प्रणाली का उल्लेख किया, जिसमें कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम-इंडिया (CERT-In) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2023 में संशोधन शामिल है, जिसने डीपफेक निर्माण और वितरण के लिए कठोर दंडों की व्यवस्था की है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा सम्मेलन के बाद जारी किए गए एक ब्रीफिंग के अनुसार, उन्होंने कहा कि इन संशोधनों के लागू होने के बाद से रिपोर्ट किए गए डीपफेक घटनाओं में 15% की गिरावट आई है।
अंतर्राष्ट्रीय ढांचे के प्रस्तावित स्तंभ
प्रधानमंत्री मोदी ने प्रस्तावित ढांचे के लिए तीन स्तंभों का उल्लेख किया:
- मानकीकृत कानूनी परिभाषाएं – साइबर धोखाधड़ी, सिंथेटिक मीडिया और AI-संचालित अपराधों के लिए शब्दों का एक एकीकृत सेट, ताकि न्यायिक अधिकार क्षेत्र की अस्पष्टता को कम किया जा सके।
- सीमा पार कानून प्रवर्तन सहयोग – साइबर अपराधियों के लिए संयुक्त जांच इकाइयां, खतरों के साइनचरों की साझा डेटाबेस और सरलीकृत प्रत्यर्पण प्रोटोकॉल।
- क्षमता निर्माण और प्रौद्योगिकी साझा करना – विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, और AI-संचालित डिटेक्शन टूल्स का वैश्विक पूल।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र नशीली दवाओं और अपराध कार्यालय (UNODC) और अंतर्राष्ट्रीय टेलीकॉम्युनिकेशन यूनियन (ITU) से इस वर्ष के बाद में तकनीकी कार्यशालाओं की श्रृंखला आयोजित करने की अपील की, जिसका उद्देश्य 2027 की शुरुआत तक एक सहमति दस्तावेज तैयार करना है।
उद्योग और कूटनीतिक प्रतिक्रियाएँ
उद्योग संगठनों ने इस पहल का स्वागत किया। भारतीय उद्योग संघ (CII) ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि यह प्रस्ताव उसके “डिजिटल इंडिया 2030” रोडमैप से अनुरूप है, जिसमें सुरक्षित डिजिटल बुनियादी ढांचे और ज़िम्मेदार AI उपयोग पर बल दिया गया है। भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम (CERT-In) ने अपने खतरा-सूचना साझाकरण मंच का विस्तार करने की योजना की घोषणा की, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ और ASEAN देशों के सहयोगी एजेंसियों को शामिल किया जाएगा।
संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रालयों ने नई दिल्ली में स्थित अपने दूतावासों के माध्यम से संक्षिप्त टिप्पणियाँ जारी कीं, जिसमें साइबर मानकों पर बहुपक्षीय संवाद के प्रति खुलने की इच्छा व्यक्त की गई। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने, जो गुमनामी की शर्त पर बोल रहे थे, कहा कि वॉशिंगटन “साइबर खतरों पर त्वरित डेटा एक्सचेंज के तंत्रों को सक्रिय रूप से खोज रहा है” और भारत की इस पहल को एक निर्माणशील कदम मानता है।
कानूनी पृष्ठभूमि और भविष्य की चरण
प्रधानमंत्री मोदी की यह अपील तब आ रही है जब भारत साइबर सुरक्षा सुधार विधेयक पेश करने की तैयारी कर रहा है, जिसकी संसदीय चर्चा दिसंबर 2026 में निर्धारित है। इस विधेयक में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म द्वारा डीपफेक सामग्री की अनिवार्य रिपोर्टिंग का प्रावधान है और यह एक साइबर-अपराध न्यायालय की स्थापना करता है, जिसकी अधिकारिता पार-राष्ट्रीय अपराधों पर होगी।
उन्होंने दुबई में मार्च 2027 में आयोजित होने वाले वैश्विक डिजिटल शासन शिखर सम्मेलन का भी उल्लेख किया, जिसे एक मंच के रूप में देखा जा रहा है जहाँ इस ढांचे को औपचारिक रूप से पेश किया जा सकता है। मोदी ने भाग लेने वाले देशों से “वाचालता से आगे बढ़ने” और ऐसे प्रवर्तनीय मानकों को अपनाने की अपील की, जो नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए नवाचार को प्रोत्साहित करें।
चुनौतियाँ और अगले मील के पत्थर
विशेषज्ञों का चेतावनी है कि सहमति हासिल करने के लिए विविध कानूनी परंपराओं और गोपनीयता विनियमों के बीच समन्वय आवश्यक होगा। नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी के साइबर कानून के एक प्रोफेसर ने चेतावनी दी कि “डेटा-साझाकरण प्रोटोकॉल को समन्वित करना एक जटिल वार्ता होगी, विशेष रूप से जहाँ संप्रभु डेटा-स्थानीकरण नीतियां स्थापित हैं।”
हालाँकि, मोदी की वैश्विक समझौते की अपील भारत की कूटनीतिक स्थिति में एक व्यापक बदलाव को दर्शाती है, जिसमें देश को साइबर-मानकों को आकार देने में एक नेता के रूप में स्थापित किया जा रहा है। अगले चरणों में एक तकनीकी अनुबंध (technical annex) का प्रारूप तैयार करना, कम से कम 30 देशों से प्रतिबद्धता प्राप्त करना और मध्य-2027 तक UNODC के तहत एक कार्य समूह की बैठक बुलाना शामिल होगा।
प्राथमिक स्रोत एवं आधिकारिक दस्तावेज़
- PM Modi calls for global framework to tackle cyber frauds, deepfakes, digital crimes
- PM Modi calls for global framework to tackle cyber fraud – Fortune India
- PM Modi Calls For Global Framework To Tackle Cyber Fraud – Inc42
- PM Modi hails India’s digital ecosystem at IMC, calls for global framework to fight cyberc