नई दिल्ली — भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने गुरुवार को नॉन-रेज़िडेंट इंडियंस (NRI) के लिए पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) से जुड़े दिशा-निर्देशों में संशोधन की घोषणा की है। इस कदम से NRI भारतीय इक्विटीज में निवेश करने में प्रक्रियात्मक बाधाओं में कमी आएगी।
NRI PMS खातों में प्रमुख बदलाव
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की 27 सितंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, RBI के इस सर्कुलर में NRI को PMS मंडेट खोलने से पहले अलग से ऑन-शोर बैंक खाता रखने की आवश्यकता हटा दी गई है। इसके बजाय, निवेशक PMS प्रदाता के साथ अपने विदेशी बैंक विवरण सीधे जोड़ सकते हैं, बशर्ते वे आधार सत्यापन का उपयोग करके मानक ‘जानिए अपने ग्राहक’ (KYC) प्रक्रिया पूरी करें।
नए ढांचे के तहत, NRI और विदेशी नागरिकों (OCI) के आधार नंबरों को पहचान सत्यापन के लिए स्वीकार किया जाएगा। यह कदम भारतीय ईगल की हालिया रिपोर्ट से अनुरूप है, जिसमें विदेशों में रहने वाले 36 मिलियन भारतीयों के लिए आधार के वैश्विक प्रसार पर चर्चा की गई थी। RBI ने कहा कि इस बदलाव का उद्देश्य दस्तावेज़ीकरण में समय की बचत और प्रवासी भारतीय समुदाय के लिए प्रवेश बाधाओं को कम करना है, जो सामूहिक रूप से अनुमानित 12 लाख करोड़ रुपये की विदेशी संपत्तियों के मालिक हैं।
निवेश सीमाओं और उत्पाद प्रस्तावों पर प्रभाव
अब NRI को RBI से पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता के बिना प्रति PMS मंडेट 2 करोड़ रुपये तक का आवंटन करने की अनुमति है, जो निवासी निवेशकों की सीमा के बराबर है। संशोधित नियमों में एक ही PMS पोर्टफोलियो में प्राइवेट इक्विटी और रियल एस्टेट फंड जैसे वैकल्पिक निवेश उत्पादों को शामिल करने की भी अनुमति दी गई है, बशर्ते प्रदाता के जोखिम प्रबंधन नीतियों का पालन किया जाए।
पोर्टफोलियो मैनेजर्स को मानकीकृत प्रारूप में शुल्क संरचना का खुलासा करना होगा, और RBI केंद्रीय बैंक की वित्तीय स्थिरता इकाई (Financial Stability Unit) को प्रस्तुत तिमाही रिपोर्ट्स के माध्यम से अनुपालन की निगरानी करेगा। दिशा-निर्देशों में निर्धारित किया गया है कि शुल्क-अनुकूलन आवश्यकताओं का कोई भी उल्लंघन RBI के प्रवर्तन प्रावधानों के अनुसार प्रबंधित संपत्तियों (assets under management) के 2 प्रतिशत तक जुर्माने के पात्र होगा।
NRI के लिए प्रक्रियात्मक चरण
PMS खाता खोलने के लिए, NRI को डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित आवेदन, मान्य पासपोर्ट की प्रतिलिपि और आधार-लिंक विदेशी पता प्रमाण पेश करना होगा। RBI के सर्कुलर में मान्य विदेशी नोटरी द्वारा जारी इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षरों के उपयोग की अनुमति दी गई है, जिससे भौतिक दस्तावेज़ों के कूरियर सेवाओं की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
जैसे ही आवेदन स्वीकृत हो जाता है, PMS प्रदाता एक समर्पित निवेश आदेश तैयार करेगा जिसे एक सुरक्षित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से एक्सेस किया जा सकता है। पोर्टल वास्तविक‑समय पोर्टफोलियो प्रदर्शन, लेनदेन इतिहास और अनुपालन चेतावनियाँ प्रदर्शित करेगा, जिससे निवेशक भारत का दौरा किए बिना अपनी होल्डिंग्स की निगरानी कर सकेंगे।
उद्योग की प्रतिक्रिया
प्रमुख दलाली कंपनियाँ और संपत्ति‑प्रबंधन फर्मों ने इस कदम का स्वागत किया है, यह बताते हुए कि सुव्यवस्थित प्रक्रिया भारतीय प्रवासी समुदाय से पूंजी की नई लहर को आकर्षित करने की संभावना रखती है। एक प्रमुख PMS प्रदाता के वरिष्ठ कार्यकारी, जिनका नाम गोपनीय रखा गया, ने कहा कि नए नियम “एक लंबे समय से चल रही बाधा को दूर करते हैं और गैर‑निवासी भारतीयों के लिए प्रौद्योगिकी व