नई दिल्ली — वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद बुधवार को कर प्रवर्तन ढाँचे में एक महत्वपूर्ण पुनर्संरचना पर विचार करेगी, जिसमें कर अधिकारियों को गैर‑अनुपालन के लिए व्यक्तियों को गिरफ्तार करने का अधिकार हटाने और आपराधिक अभियोजन की सीमा को पाँच करोड़ रुपये तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। सरकार के स्रोतों द्वारा इसे छोटे‑स्तर के कर उल्लंघनों को आपराधिक नहीं बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया
कानूनी विश्लेषक बताते हैं कि यह परिवर्तन कर प्रशासन में वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है, जहाँ अपराधी दण्ड केवल अत्यधिक दुराचार के लिए आरक्षित हैं। यह सुधार कर प्रणाली में विश्वास को मजबूत करने के लिए भी एक कदम माना जा रहा है, जिससे मामूली उल्लंघनों के लिए दण्डात्मक कार्रवाई के भय को कम करके स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहन मिलेगा। हालांकि, इन परिवर्तनों को लागू करने के लिए केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) अधिनियम और समेकित वस्तु एवं सेवा कर (IGST) अधिनियम में संशोधन आवश्यक होंगे, जो आगामी संसद के विंटर सत्र में पेश किए जाने की उम्मीद है।
विंटर सत्र का विधायी रोडमैप
सरकारी सूत्रों ने बताया कि बुधवार को जीएसटी परिषद द्वारा लिया गया निर्णय आवश्यक विधायी संशोधनों के मसौदे के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा। इस वर्ष के बाद के समय में निर्धारित विंटर सत्र को बिल के औपचारिक परिचय का मंच माना जा रहा है। विधेयक में सम्भवतः चरणबद्ध कार्यान्वयन के प्रावधान होंगे, जिससे मौजूदा मामलों को पुराने नियम के अंतर्गत निपटाया जाएगा जबकि नए अपराधों पर अपराधमुक्त ढाँचे का पालन किया जाएगा।
यह कदम केंद्रीय सरकार के कर ढाँचे को सरल बनाने और व्यवसाय करने में सुविधा बढ़ाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। मामूली कर अपराधों के लिए आपराधिक दायित्व घटाकर, सरकार एक अधिक पूर्वानुमेय और न्यायसंगत नियामक वातावरण सृजित करना चाहती है। यह भारत की चल रही आर्थिक सुधारों और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (
प्राथमिक स्रोत एवं आधिकारिक दस्तावेज़
- GST arrest powers may be removed? Council to discuss decriminalisation on Wednesday; law c
- GST Council may end arrest powers, raise prosecution threshold to Rs 5 crore – MillenniumP
- GST officers may lose arrest powers as Centre plans major enforcement reform – India Today
- GST arrest powers may be removed to ease business concerns and strengthen trust in tax sys