कोलकाता — 6 अक्टूबर 2026 को, पश्चिम बंगाल के नंदिग्राम निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग‑मशीन (ईवी
चुनाव आयोग का उत्तर
लेखन के समय तक चुनाव आयोग ने नंदिग्राम संबंधी आरोपों पर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया है। एक ईसीआई प्रवक्ता ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि आयोग सभी मतदान केंद्रों की निगरानी करता है और विश्वसनीय शिकायतों की जांच करेगा। आरोपित ईवीएम समस्याओं या उत्पीड़न से संबंधित कोई एफआईआर सार्वजनिक रूप से दर्ज नहीं किया गया है।
बाय‑इलेक्शन का संदर्भ
नंदिग्राम सीट मार्च 2026 में वर्तमान विधायक के इस्तीफ़े के बाद रिक्त हो गई। इस बाय‑पोल को 2027 के राज्य विधानसभा चुनावों से पूर्व सत्ताधारी दल की स्थिति के लिए एक परीक्षण माना जा रहा है। जिला चुनाव कार्यालय द्वारा जारी प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार इस निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता टर्नआउट 68.4 प्रतिशत रही, जो राज्य में पूर्व आयोजित बाय‑पोल्स की औसत टर्नआउट से थोड़ी अधिक है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
राज्य कांग्रेस के नेताओं ने प्रभावित बूथों में पुनः मतदान की मांग की, यह तर्क देते हुए कि कथित तकनीकी गड़बड़ियों से परिणाम बदल सकता है। सत्ताधारी दल की राज्य इकाई ने इन आरोपों को “राजनीतिक नाटक” कहकर खारिज कर दिया और मतदाताओं से परिणाम स्वीकार करने का आग्रह किया। अन्य किसी दल ने इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी नहीं की है।
कानूनी एवं प्रशासनिक कदम
प्रजासत्ताक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत, यदि कोई दल मानता है कि चुनाव में अनियमितता हुई है तो वह परिणाम घोषणा के 45 दिनों के भीतर उच्च न्यायालय में चुनाव याचिका दायर कर सकता है। कांग्रेस के अधिकारियों ने बताया कि वे मतदान डेटा की विस्तृत समीक्षा के बाद ऐसी याचिका तैयार कर रहे हैं।