GST Council to Green‑Light Freight Movement on Metro Trains

The council is expected to approve a proposal that would allow freight trains to use metro corridors, potentially cutting logistics costs and easing congestion in major cities.
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नई दिल्ली — वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद एक प्रस्ताव को अनुमोदित करने जा रही है, जिसके तहत मालगाड़ियों को मेट्रो रेल कॉरिडोर का उपयोग करने की अनुमति मिलेगी, जिससे लॉजिस्टिक लागत घटेगी और देश के सबसे व्यस्त शहरों में भीड़भाड़ कम होगी। यह निर्णय, 24 सितंबर को परिषद के सदस्यों को भेजे गए मसौदा निर्णय में घोषित किया गया था, और 27 सितंबर को होने वाली परिषद की बैठक में अपनाया जाने की उम्मीद है।

Background on the Proposal

प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय द्वारा एक ज्ञापन में प्रस्तुत किया गया, जिसमें मेट्रो रेल बुनियादी ढांचे के

कार्यान्वयन समय‑सीमा

यदि परिषद मसौदा को स्वीकृत करती है, तो भारतीय रेलवे मंत्रालय को विस्तृत कार्यान्वयन योजना तैयार करने का कार्य सौंपा जाएगा। इस योजना में मालगाड़ी के तकनीकी विनिर्देश, समय‑निर्धारण प्रोटोकॉल तथा मेट्रो लाइनों पर अपनाई जाने वाली सुरक्षा उपायों का विवरण होगा। मंत्रालय से अपेक्षा की जाती है कि वह निर्णय के 30 दिनों के भीतर इस योजना को जीएसटी परिषद को प्रस्तुत करे।

माल नीति का व्यापक संदर्भ

भारत की माल नीति ने हाल के वर्षों में कई सुधार देखे हैं, जिनमें राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति का परिचय और समर्पित माल मार्ग (डीएफसी) नेटवर्क का विस्तार शामिल है। मेट्रो कॉरिडोर के प्रस्तावित उपयोग को एक पूरक उपाय के रूप में देखा जाता है, जो विशेषकर घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में डीएफसी की पहुँच में मौजूद अंतर को पाट सकता है।

विशेषज्ञ यह भी इंगित करते हैं कि यह प्रस्ताव सरकार के कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लक्ष्य के अनुरूप है, जिसमें माल परिवहन को सड़क से रेल में स्थानांतरित किया जा रहा है। मुख्यतः विद्युत द्वारा संचालित मेट्रो रेल कॉरिडोर, डीजल‑चालित ट्रकों की तुलना में स्वच्छ विकल्प प्रदान करते हैं।

जीएसटी परिषद के अगले कदम

27 सितंबर को होने वाली परिषद की बैठक में मसौदा प्रस्ताव की समीक्षा तथा 13 सदस्य राज्यों और केंद्र सरकार द्वारा मतदान शामिल होगा। प्रस्ताव को विधि रूप में स्थापित होने के लिए बहुमत मत आवश्यक है। परिषद उन संशोधनों पर भी विचार करेगी जो राज्यों द्वारा सुझाए गए हैं, विशेषकर उन राज्यों के जो महत्वपूर्ण मेट्रो बुनियादी ढाँचा रखते हैं।

स्वीकृति मिलने के बाद, नया नियम भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा और 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होगा, जिससे हितधारकों को अपने लॉजिस्टिक योजनाओं को समायोजित करने तथा नई कर ढाँचे के अनुरूप होने का समय मिलेगा।

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