RBI Likely to Hike Repo Rate to 7.25% in October Meeting

The Reserve Bank of India is expected to raise its key repo rate by 25 basis points to 7.25% on 30 September, citing persistent inflationary pressures amid supply shocks.
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नई दिल्ली — भारत का रिज़र्व बैंक (RBI) 30 सितंबर 2026 को निर्धारित अक्टूबर मौद्रिक नीति बैठक में अपनी नीति रिपो दर को 7.25% तक बढ़ाने की उम्मीद है, यह रिपोर्टों के अनुसार डेक्कन क्रॉनिकल और बिज़नेस एक्सप्लेनर से है। यह कदम दर को 2023 के बाद के सबसे ऊँचे स्तर पर ले जाएगा और आपूर्ति प्रतिबंधों तथा बढ़ती वस्तु कीमतों से प्रेरित मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने पर निरंतर ध्यान देने का संकेत देगा।

दर वृद्धि का संदर्भ

रिज़र्व बैंक की नीति समिति ने वर्ष में दो बार मिलकर अर्थ

भारतीय रिज़र्व बैंक की नीति रूपरेखा

भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) महंगाई लक्ष्यीकरण (IT) प्रणाली के ढाँचे के अंतर्गत कार्य करती है, जिसका उद्देश्य वार्षिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) को 2%–6% की सहनशीलता बैंड में बनाए रखना है। समिति द्वारा रेपो दर में वृद्धि का निर्णय महंगाई अपेक्षाओं को स्थिर रखने के अपने दायित्व के अनुरूप है। 22 सितंबर को जारी किए गए भारतीय रिज़र्व बैंक के नवीनतम नीति विवरण में यह रेखांकित किया गया कि समिति महंगाई प्रबंधन के मुख्य साधन के रूप में रेपो दर का उपयोग जारी रखेगी।

दर वृद्धि के अतिरिक्त, भारतीय रिज़र्व बैंक अपनी तरलता प्रबंधन गतिविधियों को जारी रखेगा, जिसमें खुले बाजार संचालन और रिवर्स रेपो सुविधा का उपयोग शामिल है, ताकि धन आपूर्ति को नियंत्रित किया जा सके। केंद्रीय बैंक ने वास्तविक अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के लिए “कृषि के लिए क्रेडिट” योजना जैसी लक्षित उपायों के माध्यम से प्रतिबद्धता दोहराई, जो किसानों को प्राधान्यपूर्ण दरें प्रदान करती है।

बाजार एवं नीति दृष्टिकोण

अर्थशास्त्री अनुमान लगाते हैं कि यदि महंगाई लक्ष्य बैंड से ऊपर बनी रहती है तो अगली बैठक में अतिरिक्त 25 बेसिस पॉइंट की वृद्धि की संभावना है। भारतीय रिज़र्व बैंक की अग्रिम दिशा‑निर्देश यह संकेत देती है कि समिति महंगाई के परिदृश्य में सुधार होने तक दर को “कसाव” के मार्ग पर रखेगी।

व्यवसायिक नेताओं ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि उच्च दरें निवेश को, विशेषकर उन विनिर्माण क्षेत्रों में, जो पहले ही आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों से प्रभावित हुए हैं, निरुत्साहित कर सकती हैं। तथापि, भारतीय रिज़र्व बैंक ने यह स्पष्ट किया है कि प्राथमिक उद्देश्य अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक महंगाई की सर्पिल से बचाना है।

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