India Lowers Import Duty on Edible Oils Ahead of Festival Season

The Ministry of Commerce cut the duty on imported cooking oils from 12% to 8% on 24 September 2026, a move aimed at easing price pressures before the country’s major festivals.
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नई दिल्ली — वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय ने 24 सितंबर 2026 को घोषणा की कि खाद्य तेलों पर आयात शुल्क 12% से घटाकर 8% किया जाएगा, जो 1 अक्टूबर से प्रभावी होगा। यह निर्णय, जिसे हिंदू, बिज़नेस स्टैंडर्ड, एनडीटीवी और लाइवमिंट ने रिपोर्ट किया है, दिवाली, होली और अन्य त्योहारों के पूर्व बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

नीति के विवरण और कार्यान्वयन

वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी परिपत्र में कहा गया है कि यह शुल्क कटौती सभी खाद्य तेल आयातों पर लागू होगी, जिसमें सूरजमुखी, सोयाबीन, पाम और मूंगफली के तेल शामिल हैं। यह परिवर्तन 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने के लिए निर्धारित है, जिससे आयातकों को अपनी मूल्य संरचनाओं को समायोजित करने के लिए 30‑दिन का समय मिलेगा। मंत्रालय ने तेल प्रसंस्करण कंपनियों को भी निर्देश दिया है कि वे इस लाभ को उपभोक्ताओं तक पहुँचाएँ, यह बताते हुए कि यह शुल्क कटौती “मूल्य समर्थन उपाय” है न कि अनुदान।

आर्थिक संदर्भ

पिछले वर्ष में भारत के खाद्य तेल बाजार में खुदरा कीमतों में 15% की वृद्धि हुई है, जो वैश्विक कच्चे तेल की लागत में वृद्धि और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला में अवरोधों के कारण हुई है। यह शुल्क कटौती मानसून के बाद आने वाले उच्च उपभोग अवधि के दौरान खाद्य कीमतों को स्थिर करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। सरकार की यह चाल 2024 में खाद्य तेलों पर समान शुल्क कटौती के बाद आई है, जिसे कीमतों में अस्थायी गिरावट के लिए श्रेय दिया गया था।

उद्योग की प्रतिक्रिया

हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईटीसी लिमिटेड और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसी प्रमुख तेल प्रसंस्करण कंपनियों ने पुष्टि की है कि वे कम शुल्क को प्रतिबिंबित करने के लिए अपनी कीमतों को समायोजित करेंगी। हिंदुस्तान यूनिलीवर के एक प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी “अपनी लागत‑से‑मूल्य अनुपात की समीक्षा करेगी और उसी के अनुसार खुदरा कीमतों को समायोजित करेगी।” उद्योग ने इस उपाय का स्वागत किया है, यह कहते हुए कि यह त्योहारों के दौरान परिवारों पर लागत का बोझ कम करने की संभावना रखता है।

उपभोक्ता दृष्टिकोण

उपभोक्ता समूहों ने शुल्क में कटौती का स्वागत किया है, यह तर्क देते हुए कि इससे कम आय वाले घरों के लिए पकाने का तेल किफायती बना रहेगा। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन ने खुदरा विक्रेताओं से कीमत में कटौती को पारदर्शी रखने और मूल्य दोहन से बचने का निर्देश जारी किया है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने भी एक निगरानी तंत्र की घोषणा की है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शुल्क कटौती के लाभ अंतिम उपभोक्ता तक पहुँचें।

सरकारी रुख

वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए एक बयान में सरकार ने कहा कि शुल्क में कमी “भोजन तेल क्षेत्र में महंगाई के दबावों का मुकाबला करने के लिए आवश्यक” है। मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि यह उपाय घरेलू तेल उत्पादन को प्रभावित नहीं करेगा, जो कृषि क्षेत्र के उत्पादन का एक प्रमुख घटक बना हुआ है।

भविष्य की दृष्टि

विश्लेषकों का अनुमान है कि शुल्क में कटौती से खाद्य तेलों की खुदरा कीमतों में 5% से 7% तक की गिरावट आ सकती है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियाँ अपने मार्जिन को कितनी शीघ्रता से समायोजित करती हैं। सरकार ने संकेत दिया है कि वह त्योहारी मौसम के बाद शुल्क कटौती के प्रभाव की समीक्षा करेगी और यदि मूल्य अस्थिरता बनी रहती है तो आगे की समायोजन पर विचार किया जा सकता है।

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