नई दिल्ली — 28 सितंबर 2026 को जारी एक यूनीसेफ रिपोर्ट में पाया गया कि 5 करोड़ भारतीय बच्चों को अभी भी अपने स्कूलों में बुनियादी स्वच्छता सेवाओं तक पहुँच नहीं है। संगठन की वार्षिक वैश्विक मूल्यांकन का हिस्सा यह अध्ययन उजागर करता है कि देश में 50 मिलियन से अधिक छात्रों के स्कूलों में शौचालय, हाथ धोने की सुविधाएँ या साफ पानी उपलब्ध नहीं है।
स्कूल स्वच्छता में व्यापक अंतर
रिपोर्ट में बताया गया है कि देश भर में स्वच्छता बुनियादी ढाँचा असमान है। जबकि कुछ राज्यों ने शौचालय और हाथ धोने की सुविधाओं की स्थापना में प्रगति की है, उत्तर और मध्य क्षेत्रों के बड़े हिस्से अभी भी पीछे हैं। बुनियादी सुविधाओं की कमी का संबंध छात्र‑छात्राओं की अनुपस्थिति में वृद्धि, विशेषकर लड़कियों में, तथा छात्रों में अतिसार जैसी रोगों की बढ़ती दरों से जोड़ा गया है।
सरकारी प्रतिबद्धत
अंतर्राष्ट्रीय तुलना
UNICEF के मूल्यांकन में भारत की स्वच्छता कवरेज की तुलना अन्य बड़े विकासशील देशों से भी की गई है। उदाहरण के तौर पर, नाइजीरिया को स्कूल स्वच्छता की कमी वाले बच्चों की संख्या के संदर्भ में दूसरा सबसे अधिक प्रभावित देश बताया गया, जहाँ 3 करोड़ छात्रों को यह समस्या प्रभावित करती है। यह तुलना इस बात को रेखांकित करती है कि भारत की चुनौती अद्वितीय नहीं है, परन्तु इसका पैमाना अभूतपूर्व है।
स्वास्थ्य और शैक्षिक परिणामों पर प्रभाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि स्कूलों में अपर्याप्त स्वच्छता संक्रामक रोगों के प्रसार में योगदान देती है। अध्ययन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के आँकड़ों का हवाला देता है, जिसमें शौचालय रह