नई दिल्ली — रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों के क्रय को मंजूरी दे दी, जो कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के बेंगलुरु संयंत्र में दूसरे उत्पादन लाइन की स्थापना को प्रोत्साहित करेगी। रक्षा सचिव अजय कुमार द्वारा घोषित इस कदम के साथ, 2016 में 36 राफेल विमानों के पूर्ववर्ती क्रय और 2019 में भारतीय वायु सेना (IAF) को 12 विमानों के हस्तांतरण का सिलसिला जारी रहेगा।
भारत का राफेल क्रय घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देगा
रक्षा सचिव ने कहा कि यह नया क्रय भारत को HAL संयंत्र में प्रतिवर्ष 12 राफेल विमानों के उत्पादन के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगा, जो कि देश की विदेशी विमानों पर निर्भरता कम करने की रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा रहा है। इस निर्णय को भारतीय वायु सेना के संचालनात्मक आवश्यकताओं और फ्रांसीसी निर्माता द्वारा प्रस्तावित तकनीकी हस्तांतरण पैकेज की उपलब्धता की समीक्षा के बाद लिया गया है।
मंत्रालय की मंजूरी के अनुसार, अगले दशक में 114 विमानों को चरणबद्ध रूप से हस्तांतरित किया जाएगा, जिसमें पहली चरण की आपूर्ति 2028 में प्रतीत होती है। यह क्रय भारत की वायु शक्ति को मजबूत करने और देश के बढ़ते हुए रक्षा बजट का समर्थन करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है, जो हाल के वर्षों में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 2.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
भारतीय वायु सेना के क्रय समिति द्वारा फरवरी 2026 में जारी रिपोर्ट में इस क्रय की सिफारिश किए जाने के बाद रक्षा मंत्रालय ने अपनी स्वीकृति दी थी। समिति ने उल्लेख किया कि राफेल के उन्नत एवियोनिक्स, स्टील्थ विशेषताएं और बहुभूमिका क्षमताएं भारतीय वायु सेना की संचालनात्मक लचीलापन को बढ़ाएंगी।
2016 में डसॉल्ट एविएशन के साथ तकनीकी हस्तांतरण समझौते के हस्ताक्षर के बाद, HAL में भारत की पहली उत्पादन लाइन 2019 में शुरू हुई थी। नई लाइन संयंत्र के उत्पादन क्षमता को दोगुना कर देगी, जिससे देश को अधिक विमानों का घरेलू उत्पादन करने और हज़ारों इंजीनियरों और तकनीशियनों के लिए रोजगार सृजित करने में सक्षम बनाएगी।
एक बयान में, रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह खरीद भारत को इंडो‑पैसिफिक क्षेत्र में अपने रणनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने में भी मदद करेगी, जहाँ भारतीय वायु सेना अपनी उपस्थिति का विस्तार कर रही है। मंत्रालय ने बताया कि नए जेट को भारतीय वायु सेना के मौजूदा मिग‑29, सु‑30एमकेआई और अन्य विमानों के बेड़े में सम्मिलित किया जाएगा।
ग्लोबल टाइम्स ने एक स्वतंत्र रिपोर्ट में भारत के उच्च रक्षा खर्च को प्रेरित करने वाली रणनीतिक चिंता को उजागर किया। लेख में बताया गया कि राफ़ाल जैसे उन्नत विमानों की खरीद देश के क्षेत्रीय खतरों का मुकाबला करने और रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
जबकि रक्षा विश्लेषकों ने इस खरीद का स्वागत किया है, कुछ आलोचकों ने बताया कि 114 जेटों की लागत लगभग ₹1.5 ट्रिलियन अनुमानित है, जो रक्षा बजट पर दबाव डाल सकती है। मंत्रालय ने कहा है कि इस लागत को घरेलू उत्पादन के दीर्घकालिक लाभ और रखरखाव लागत में कमी के माध्यम से संतुलित किया जाएगा।
पिछले कुछ वर्षों में भारत की रक्षा खरीद नीति अधिक घरेलू उत्पादन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की ओर मुड़ गई है। राफ़ाल सौदा इस प्रवृत्ति का नवीनतम उदाहरण है, जो 2016 में 36 विमानों की खरीद और उसके बाद एचएएल में 12 जेटों के उत्पादन के बाद आया है।
रक्षा मंत्रालय का यह निर्णय भारतीय वायु सेना द्वारा अपने बेड़े को आधुनिकीकरण करने के बढ़ते दबाव के बीच आया है। भारतीय वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने क्षेत्रीय विकास के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए अधिक उन्नत विमानों की खरीद का आह्वान किया है।
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