नई दिल्ली — वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी किए गए आँकड़ों के अनुसार, 21 सितंबर 2026 तक भारत के माल निर्यात में वर्ष-तक-तारीख (year-to-date) आधार पर 15 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल द्वारा रिपोर्ट की गई यह वृद्धि संयुक्त राज्य अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात और यूरोपीय संघ जैसे प्रमुख बाजारों में पेट्रोलियम उत्पादों, इंजीनियरिंग सामान और फार्मास्यूटिकल्स की शिपमेंट्स में वृद्धि को दर्शाती है।
क्षेत्रवार निर्यात प्रदर्शन
मंत्रालय के निर्यात-प्रदर्शन ब्यूलेटिन के अनुसार, पेट्रोलियम उत्पादों की मूल्यवृद्धि 28 प्रतिशत रही, जबकि इंजीनियरिंग सामान में 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वैश्विक लक्ज़री मांग में 둔वारी के बावजूद, फार्मास्यूटिकल्स निर्यात में 14 प्रतिशत और रत्न एवं आभूषणों में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई। संयुक्त राज्य अमेरिका कुल निर्यात मूल्य का 18 प्रतिशत हिस्सा रखते हुए शीर्ष गंतव्य बना रहा, जिसे संयुक्त अरब अमीरात (13 प्रतिशत) और संयुक्त राज्य ब्रिटेन (9 प्रतिशत) ने पार किया।
नीतिगत पृष्ठभूमि
गोयल ने इस उछाल को समर्थन देने वाले कई नीतिगत उपायों पर प्रकाश डाला। निर्यात प्रोत्साहन पूंजीगत सामान (EPCG) योजना को अतिरिक्त दो वर्षों के लिए बढ़ाया गया, जिससे निर्यातक कमजोर शुल्क पर पूंजीगत उपकरणों का आयात कर सकें। सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स और मेडिकल डिवाइस जैसे उच्च-मूल्य वाले क्षेत्रों को लक्ष्य बनाते हुए भारत से माल निर्यात योजना (MEIS) के प्रोत्साहनों के कार्यान्वयन की प्रक्रिया को भी तेज किया है।
पिछले वित्तीय वर्ष से तुलना
वित्तीय वर्ष 2024-25 के समान अवधि के दौरान, मंत्रालय के ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, माल निर्यात में 9.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। इस प्रकार, वर्तमान 15 प्रतिशत की वृद्धि एक महत्वपूर्ण गतिशीलता को दर्शाती है, जिससे सितंबर 2025 में 12.5 अरब डॉलर पर खड़ा व्यापार घाटे का अंतर कम हुआ है।
बाहरी कारक
विश्लेषकों का कहना है कि ऊर्जा और रक्षा संबंधी उपकरणों की मजबूत वैश्विक मांग से भारतीय निर्यातकों को लाभ हुआ है। पूर्वी यूरोप में जारी भू-राजनीतिक तनावों के कारण कुछ यूरोपीय खरीदारों ने भारतीय पेट्रोलियम व्युत्पन्न (petroleum derivatives) की ओर रुख किया है, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका की आपूर्ति श्रृंखला (supply-chain) में विविधता लाने पर नवीनतम ध्यान से भारतीय इंजीनियरिंग घटकों के ऑर्डर में वृद्धि हुई है।
भविष्य की उम्मीदें
मंत्रालय का अनुमान है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत तक कुल माल निर्यात पिछले वर्ष दर्ज किए गए 393 अरब डॉलर से बढ़कर 450 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। गोयल ने निर्यातकों से अपील की कि वे इस गति को बनाए रखें और अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया के उभरते बाजारों में विविधता लाएं।