बेंगलुरु — कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बुधवार को राज्य की हालिया भर्ती अभियान के तहत शिक्षकों के रूप में नियुक्त किए गए उम्मीदवारों की चयन सूचियों को खारिज कर दिया, यह निर्णय लेते हुए कि प्रक्रिया शुरू होने के बाद प्राधिकारियों ने अवैध रूप से चयन मानदंडों में बदलाव किया था।
भर्ती अभियान की पृष्ठभूमि
राज्य सरकार ने वर्ष 2026 की शुरुआत में कर्नाटक भर के सरकारी विद्यालयों के लिए शिक्षकों की बड़े पैमाने पर भर्ती की घोषणा की थी। लोक शिक्षा विभाग के माध्यम से आवेदन आमंत्रित किए गए थे और कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) द्वारा प्रकाशित पूर्व-निर्धारित मानदंडों के अनुसार इनका मूल्यांकन किया जाना था, जिसमें शैक्षणिक योग्यता, शिक्षण अनुभव और लिखित परीक्षा में प्रदर्शन शामिल थे।
अर्जी और न्यायालयीन प्रक्रिया
असफल आवेदकों की एक समूह ने उच्च न्यायालय में एक अर्जी दायर की, जिसमें आरोप लगाया गया कि विभाग ने लिखित परीक्षा आयोजित किए जाने के बाद नए पात्रता मानदंडों का प्रारंभ किया और परीक्षा स्कोर के वेटेज में बदलाव किया। अर्जीकर्ताओं ने तर्क दिया कि ये परिवर्तन उन उम्मीदवारों के लिए हानिकारक थे जिन्होंने मूल मानदंडों के अनुसार तैयारी की थी, और यह कर्नाटक लोक सेवा आयोग (भर्ती) नियमों, 2020 में वर्णित न्यायसंगतता के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
उच्च न्यायालय के निष्कर्ष
अर्जीकर्ताओं और राज्य के कानूनी सलाहकारों के तर्कों को सुनने के बाद, पीठ ने निष्कर्ष निकाला कि प्रक्रिया के बीच किए गए संशोधनों की कोई भर्ती अधिसूचना के संशोधन द्वारा अनुमति नहीं दी गई थी। न्यायालय ने उल्लेख किया कि ये परिवर्तन नए सार्वजनिक नोटिस के बिना किए गए थे, जिससे पारदर्शी चयन प्रक्रियाओं के लिए कानूनी आवश्यकता का उल्लंघन हुआ। परिणामस्वरूप, न्यायालय ने चयनित उम्मीदवारों की पूरी सूची को रद्द कर दिया और विभाग को मूल मानदंडों पर लौटने का निर्देश दिया।
आदेश के लिए कानूनी आधार
निर्णय में कर्नाटक लोक सेवा आयोग (भर्ती) नियमों की धारा 15 का हवाला दिया गया, जो यह निर्धारित करती है कि चयन मानदंडों में कोई भी परिवर्तन आधिकारिक गजट में प्रकाशित किया जाना चाहिए और सभी आवेदकों को सूचित किया जाना चाहिए। न्यायालय ने पाया कि विभाग ने इस प्रावधान का पालन करने में विफल रहा, जिससे परिवर्तित मानदंड “अधिकार से परे” (ultra vires) और शून्य घोषित किए गए।
उम्मीदवारों और विभाग के लिए प्रभाव
यह आदेश लगभग 12,000 आवेदकों को प्रभावित करता है, जिन्हें अस्थायी चयन सूची में स्थान दिया गया था। अब इन उम्मीदवारों को मूल दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करते हुए नई गुणवत्ता-आधारित छनौट प्रक्रिया का इंतजार करना होगा। विभाग को न्यायालय को संशोधित सूची प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है।
राज्य अधिकारियों ने संकेत दिया है कि भर्ती अभियान जारी रहेगा, हालांकि उन्होंने चयन प्रक्रिया के लिए कोई नया समय-सारणी प्रदान नहीं किया है। लोक शिक्षा विभाग ने न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन की पुष्टि करते हुए एक संक्षिप्त बयान जारी किया और आश्वासन दिया कि “भर्ती प्रक्रिया की अखंडता बहाल की जाएगी।”
शिक्षक संघों की प्रतिक्रिया
कर्नाटक राज्य शिक्षक संघ ने इस फैसले का स्वागत किया, जिसे उन्होंने “आवश्यक सुधार” के रूप में वर्णित किया, जो गुणवत्ता और न्याय का पालन करता है। संघ ने कहा कि यह पुनः-चयन की निगरानी करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई और प्रक्रियात्मक अनियमितता न हो।
आगामी कदम
उच्च न्यायालय ने विभाग को 15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट जमा करने का आदेश दिया, जिसके बाद पीठ संशोधित चयन सूक्षा की समीक्षा करेगी। यदि विभाग निर्धारित समय सीमा का पालन करने में विफल रहता है या मूल मानकों से फिर भी विचलित होता है, तो न्यायालय ने चेतावनी दी है कि यह और उपायवाधक उपाय, जिसमें स्वतंत्र निगरानी समिति की नियुक्ति शामिल है, लागू कर सकता है।