वैटिकन सिटी — पोप फ्रांसिस ने सोमवार को चेतावनी दी कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के वैश्विक विस्तार के साथ, मानवता को उसकी मूल पहचान खोने का खतरा है, जिसे उन्होंने ‘यंत्रों के स्वर्ग’ के रूप में वर्णित किया। फ्रांस में विज्ञानियों, धार्मिक नेताओं और नीति निर्माताओं के मिश्रित समूह को संबोधित करते हुए, पोप ने कहा कि AI प्रणालियों का तीव्र विकास मानव जीवन को परिभाषित करने वाले नैतिक मूल्यों को क्षति पहुँचा सकता है।
नैतिक सुरक्षा उपायों की अपील
पोप की ये टिप्पणियाँ AI शासन, डेटा गोपनीयता और स्वचालन के माध्यम से श्रमिकों को विस्थापित करने की संभावनाओं पर बढ़ते वैश्विक विवाद के बीच आईं। उन्होंने सरकारों, निगमों और तकनीकी समुदाय से अपील की कि वे AI उपकरणों के डिज़ाइन और कार्यान्वयन में मानव गरिमा के सम्मान को समाहित करें। वैटिकन की 2023 में जारी डिजिटल नैतिकता पर हालिया दस्तावेज़ ने पहले ही “मानव-केंद्रित” दृष्टिकोण की मांग की थी, और पोप की नवीनतम टिप्पणियों ने इस स्थिति को और मजबूत किया है।
बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, पोप ने जोर दिया कि तकनीक का उद्देश्य मानवता की सेवा होना चाहिए, न कि उसे बदलना। उन्होंने चेतावनी दी कि अनियंत्रित “यंत्रों का स्वर्ग” सहानुभूति, रचनात्मकता और नैतिक निर्णय लेने की क्षमता के नुकसान की ओर ले जा सकता है। वैटिकन के संचार सचिवालय ने दोहराया कि चर्च “जिम्मेदार नवाचार” को प्रोत्साहित करना चाहता है, जो सामान्य हित के अनुरूप हो।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ
यूरोपीय नेताओं ने भी समान चिंताओं को व्यक्त किया है। पोप के भाषण के बाद जारी एक बयान में, यूरोपीय आयोग ने AI के मूल अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करने के लिए एक समन्वित नियामक ढांचे की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। फ्रांसीसी डिजिटल मामलों के मंत्रालय ने AI नैतिकता पर एक बहु-हितधारक मंच बुलाने की योजना की घोषणा की, जिसमें पोप की चेतावनी को संवाद के लिए एक प्रेरक कारक के रूप में उद्धृत किया गया।
मनीकंट्रोल.कॉम ने उल्लेख किया कि पोप की टिप्पणियाँ तब आईं जब संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन सहित कई देश AI के दुरुपयोग को रोकने के लिए कानून बनाने की प्रक्रिया में हैं। वैटिकन की स्थिति, विशेष रूप से निगरानी, डीप-फेक तकनीक और स्वतंत्र हथियारों में AI के उपयोग के संबंध में, चल रही नीतिगत चर्चाओं को नैतिक वजन प्रदान करती है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
वेटिकन ने लंबे समय से उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के साथ जुड़ाव किया है। 2020 में, पोप फ्रांसिस ने “डिजिटल चेतना” की मांग की, जो इंटरनेट के विकास का मार्गदर्शन करेगी। उनका नवीनतम चेतावनी इस कथानक पर आधारित है, जिसमें यह बल दिया गया है कि एआई को ऐसे सिद्धांतों द्वारा संचालित किया जाना चाहिए जो असुरक्षित वर्गों की रक्षा करें और प्रत्येक व्यक्ति के अंतर्निहित मूल्य को संरक्षित रखें।
एलबीसीआई लेबनान ने रिपोर्ट किया कि पोप ने यह भी बताया कि यदि एआई के लाभ कुछ ही निगमों में केंद्रित हो जाएँ तो सामाजिक असमानता बढ़ने का खतरा है। उन्होंने “सहयोग‑आधारित” दृष्टिकोण की वकालत की, और समृद्ध राष्ट्रों से आग्रह किया कि वे एआई प्रगति को जिम्मेदारी से विकासशील देशों के साथ साझा करें।
भविष्य के कदम
भाषण के पश्चात्, वेटिकन ने धर्मशास्त्रियों, नैतिकविदों और एआई शोधकर्ताओं से मिलकर एक सलाहकार परिषद की स्थापना की घोषणा की। यह परिषद पवित्र सी के भविष्य के एआई नीति सहभागिता हेतु सिफारिशें तैयार करेगी, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मानकों पर प्रभाव डालना है।
मले मेल ने जोड़ा कि पोप का संदेश दर्शकों द्वारा अच्छी तरह स्वीकार किया गया, और कई प्रतिभागियों ने अपने शोध कार्यक्रमों में नैतिक विचारों को शामिल करने का संकल्प लिया। वेटिकन की यह पहल धार्मिक संस्थानों के प्रौद्योगिकी पर सार्वजनिक विमर्श में प्रवेश करने के व्यापक रुझान को दर्शाती है।
हालाँकि पोप के बयानों में विधायी अधिकार नहीं है, वे यह स्पष्ट करते हैं कि एआई विकास को नैतिक जिम्मेदारी के साथ संतुलित किया जाना चाहिए। जैसे-जैसे एआई प्रणालियाँ अधिक स्वायत्त होती जा रही हैं, “मशीनों का स्वर्ग” की मांग, जो मानव गरिमा का सम्मान करती है, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में तात्कालिकता प्राप्त कर रही है।
प्राथमिक स्रोत एवं आधिकारिक दस्तावेज़
- Pope warns against ‘losing humanity’ to AI machines
- Pope Leo warns against losing humanity in ‘paradise of machines’ amid AI rise – Moneycontr
- Pope warns against losing humanity in ‘paradise of machines’… – LBCI Lebanon
- Pope cautions that humanity is at risk in AI ‘paradise of machines’ during France trip – M