नई दिल्ली — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को इंडोनेशिया के प्रामबानान मंदिर का एक हवाई दृश्य (एरियल वीडियो) साझा किया, जिसमें उन्होंने इस नौवीं शताब्दी के हिंदू धार्मिक स्थल को “भव्य” बताते हुए दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक बंधन पर प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया चैनलों पर साझा किए गए इस दृश्य में, जोकि यूनेस्को विश्व विरासत स्थल है और जिसकी हर साल लाखों पर्यटक विजिट करते हैं, योर्ग्याकार्टा के पास एक पहाड़ी पर स्थित इस विशाल पत्थर के संकुल का चित्रण किया गया है।
परीक्षण की पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री मोदी की यह टिप्पणी उनके इंडोनेशिया के तीन दिवसीय राजकीय दौरे के दौरान की गई, जो दशक भर के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा किया गया पहला ऐसा दौरा है। इस दौरे की योजना में राष्ट्रपति जोको विदोदो से मुलाकात, रक्षा सहयोग पर संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस और मध्य जावा के विरासत स्थलों का सांस्कृतिक प्रतिनिधिमंडल द्वारा भ्रमण शामिल था। यह दौरा एक व्यापक भारत-इंडोनेशियाई साझेदारी का हिस्सा है, जिसने इस वर्ष अपने कूटनीतिक संबंधों के 70वें वर्षगांठ का पालन किया है।
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में, दोनों सरकारों ने पर्यटन, विरासत संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग को विस्तार देने की अपनी इच्छा की पुष्टि की। बयान में उल्लेख किया गया कि दोनों देशों के बीच प्राचीन समुद्री व्यापार मार्गों की एक विरासत साझा है, जो भारतीय उपमहाद्वीप को इंडोनेशियाई द्वीपसमूह से जोड़ती थीं।
प्रामबानान का महत्व
ईसा की जन्म से 850 और 925 के बीच निर्मित, प्रामबानान दक्षिण-पूर्व एशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर संकुल है। ब्रह्मा, विष्णु और शिव की त्रिमूर्ति को समर्पित इसके ऊँचे शिखर, क्लासिकल मध्य जावानी वास्तुकला शैली का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। यूनेस्को ने 1991 में इस स्थल को अपनी विश्व विरासत सूची में शामिल किया, जिसमें इसकी उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्य और निरंतर संरक्षण की आवश्यकता का उल्लेख किया गया था।
भारत के संस्कृति मंत्रालय ने लंबे समय से इंडोनेशिया में विरासत परियोजनाओं का समर्थन किया है, जिसमें 2022 में मंदिर के पत्थर के नक्काशीदार कार्यों के पुनर्निर्माण के लिए एक अनुदान भी शामिल है। इस दौरे के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने प्राचीन संस्कृत अभिलेखों पर एक संयुक्त शोध कार्यक्रम पर चर्चा करने के लिए इंडोनेशियाई सांस्कृतिक अधिकारियों से मुलाकात की, जो प्रामबानान में पाए गए हैं।
आर्थिक और पर्यटन के पहलू
भारत के पर्यटन मंत्रालय का अनुमान है कि यदि प्रचार अभियान प्रामबानान जैसे प्रतीकात्मक स्थलों का उपयोग करते हैं, तो अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय पर्यटक आगमन में 15 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 2025 में 1.2 मिलियन भारतीय पर्यटकों ने इंडोनेशिया का दौरा किया, जिससे यह चीन और मलेशिया के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा स्रोत बाजार बन गया।
इस दौरे के दौरान, भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने एक प्रस्तावित “भारत-इंडोनेशियाई विरासत कॉरिडोर” का भ्रमण किया, जो प्रामबानान को भारत के अपने यूनेस्को स्थलों, जिसमें कोंक के सूर्य मंदिर और खजुराहो स्मारक समूह शामिल हैं, से जोड़ेगा। अधिकारियों ने कहा कि यह कॉरिडोर प्रतिवर्ष अतिरिक्त 200,000 पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है, जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए अनुमानित 1.8 अरब रुपये की आय उत्पन्न होगी।
संरक्षण सहयोग
दोनों सरकारों ने जलवायु‑संबंधित खतरों से सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इंडोनेशिया के पर्यावरण और वन मंत्रालय ने मंदिर परिसर के आसपास कटाव को कम करने के हालिया प्रयासों को उजागर किया, जबकि भारत के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने जलवायु‑सहनशील पत्थर संरक्षण तकनीकों पर तकनीकी सहायता की पेशकश की।
एक संयुक्त प्रेस ब्रीफिंग में, मंत्रालयों ने एक