न्यू यॉर्क — नेपाल के प्रधान मंत्री बलेंद्र शाह ने 25 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा
भारत और चीन की प्रतिक्रियाएँ
भारत के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक विज्ञप्ति के माध्यम से शाह के प्रस्ताव का जवाब दिया। विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारत “पेरिस समझौते और संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन पर ढांचागत संधि (यूएनएफसीसीसी) के प्रति अपने प्रतिबद्धताओं के अनुरूप” इस तंत्र का समर्थन करेगा।
संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत वांग यी ने न्यूयॉर्क स्थित चीनी दूतावास के माध्यम से एक संक्षिप्त टिप्पणी जारी की। उन्होंने कहा कि चीन इस प्रस्ताव पर विचार करेगा और बीजिंग ने नेपाल और भारत के साथ “हिमालयी जलवायु सहयोग” के एक ढांचे पर कई वर्षों से काम किया है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा का संदर्भ
यह भाषण संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की 81वीं सत्र के दौरान दिया गया, जहाँ सदस्य देशों ने टिकाऊ विकास लक्ष्यों (एसडीजी) पर प्रगति की समीक्षा की। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पहले ही जलवायु-संबंधी आपदाओं से निपटने के लिए “क्षेत्रीय सहयोग” की आवश्यकता पर बल दिया था। शाह की एक समर्पित तंत्र की मांग को गुटेरेस की टिप्पणियों का एक अनुसरण माना गया।
जलवायु वित्त के लिए प्रभाव
शाह का प्रस्ताव तब आया है जब अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक ने हिमालयी जलवायु अनुकूलन के लिए 5 अरब डॉलर के एक नए कोष की घोषणा की है। इस तंत्र का उद्देश्य उस वित्त का एक हिस्सा नेपाल के सबसे कमजोर जिलों तक पहुंचाना होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह तंत्र भारत और चीन से नेपाल के स्थानीय अधिकारियों तक तकनीक और विशेषज्ञता के हस्तांतरण को भी सुगम बनाएगा।
आगामी कदम
नेपाली सरकार की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अगले महीने के भीतर इस तंत्र के ढांचे का प्रारूप तैयार करने के लिए एक कार्य समूह का गठन किया जाएगा। इस समूह में तीनों देशों के पर्यावरण, जल संसाधन और आपदा प्रबंधन मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। प्रारूप 2027 में होने वाली अगली संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन में प्रस्तुत किया जाएगा।