न्यूयॉर्क — इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के समक्ष दिए गए भाषण में गज़ा में इज़राइल के सैन्य अभियान का बचाव किया, जबकि विरोध प्रदर्शन के रूप में कई देशों के प्रतिनिधियों ने सभा का बहिष्कार किया।
बढ़ती तनावपूर्ण स्थिति के बीच भाषण
महासभा कक्ष में दिए गए नेतन्याहू के इस भाषण ने इज़राइली नेता की ओर से इस संघर्ष के प्रारंभिक चरणों में तीव्रता पाने के बाद संयुक्त राष्ट्र के समक्ष सीधे बयान देने का पहला मौका प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इज़राइल के पास गज़ा स्थित सशस्त्र समूहों द्वारा किए गए, जिन्हें उन्होंने “बिना किसी कारण के हमलों” के रूप में वर्णित किया, के विरुद्ध स्वयं की रक्षा करने का अधिकार है। प्रधानमंत्री ने दोहराया कि इज़राइल के सैन्य बल केवल सैन्य लक्ष्यों को निशाना बना रहे हैं और नागरिकों के मारे जाने का मामला व्यापक संघर्ष का एक अप्रत्याशित परिणाम है।
प्रतिनिधियों का बहिष्कार असंतोष का संकेत
नेतन्याहू के बोलने से पहले, कई सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने समन्वित रूप से महासभा कक्ष को छोड़ दिया। बीबीसी, अफ्रीकैन्यूज़ और जॉर्जिया टुडे ने इस घटना की रिपोर्ट करते हुए उल्लेख किया कि यह बहिष्कार इज़राइल के सैन्य कार्रवाइयों के विरुध्द एक प्रोटेस्ट का रूप था। प्रतिनिधियों ने मौन में सभा कक्ष को छोड़ा, और बहिष्कार समाप्त होने के बाद ही महासभा की कार्यवाही फिर से शुरू हुई।
संयुक्त राष्ट्र बहस का संदर्भ
संयुक्त राष्ट्र गज़ा संघर्ष पर अंतर्राष्ट्रीय बहस का केंद्र बिंदु रहा है। इस वर्ष के प्रारंभिक चरणों में, महासभा ने एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें गज़ा में आतंकवाद के विरुद्ध और गज़ा में मानवीय सहायता के लिए अपील की गई थी। सदस्य देशों की बहुमत द्वारा स्वीकृत यह प्रस्ताव मार्च 2026 में शुरू हुए बढ़ते हिंसा का जवाब था। इज़राइल की सरकार ने लगातार इस प्रस्ताव का खंडन किया है, यह तर्क देते हुए कि यह उसके सुरक्षा हितों को नुकसान पहुंचाता है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
नेटन्याहू के भाषण पर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ मिलीं। जबकि इज़राइली अधिकारियों ने प्रधान मंत्री के देश की कार्रवाइयों के बचाव की प्रशंसा की, कई संयुक्त राष्ट्र सदस्य राज्यों ने संघर्ष के मानवीय प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की। वॉक‑आउट को पर्यवेक्षकों ने निंदा के प्रतीकात्मक इशारे के रूप में देखा, हालांकि इससे सभा के भीतर किसी भी तात्कालिक प्रक्रियात्मक परिवर्तन का कारण नहीं बना।
यूएन प्रक्रियाओं पर प्रभाव
यह घटना उन चुनौतियों को उजागर करती है जिनका सामना संयुक्त राष्ट्र को उन संघर्षों को संबोधित करते समय करना पड़ता है जिनमें महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक हित शामिल हैं। सभा के नियम वॉक‑आउट को विरोध के एक रूप के रूप में स्वीकार करते हैं, परंतु ऐसी कार्रवाइयाँ दुर्लभ ही बहस के पाठ्यक्रम को बदलती हैं। सामान्य सभा का अगला सत्र गाज़ा संघर्ष पर चर्चा जारी रखेगा, जिसमें मानवीय राहत और संभावित कूटनीतिक समाधानों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
प्राथमिक स्रोत एवं आधिकारिक दस्तावेज़
- Netanyahu defends Israeli military action as delegates walk out before UN speech
- Netanyahu defends Israeli military action as delegates walk out before UN speech – BBC
- UN delegates walk out at Netanyahu defends Israeli military action – africanews.com
- At UN, Netanyahu defends Israel as delegates walk out – Georgia Today