भारत ने रक्षा आत्मनिर्भरता को बढ़ाया, अमेरिकी संबंधों को सुदृढ़ किया

रक्षा मंत्रालय ने घरेलू उत्पादन में तेज़ी और रणनीतिक स्वायत्तता को रेखांकित किया, जबकि संयुक्त अभ्यासों के बीच भारत‑अमेरिका रक्षा सहयोग गहरा हो रहा है।
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नई दिल्ली — रक्षा मंत्रालय ने 27 सितंबर को घोषणा की कि भारत का रक्षा उत्पादन विस्तारित हुआ है, जो देश की आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वायत्तता की दिशा में उठाए गए कदमों को रेखांकित करता है। प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से जारी बयान में कहा गया कि प्रमुख हथियार प्रणालियों का घरेलू उत्पादन बढ़ा है, जिससे भारत को विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने में सहायता मिलेगी।

भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को गति मिल रही है

मंत्रालय ने कहा कि स्वदेशी उत्पादन में वृद्धि राष्ट्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इसने लाइट कॉम्बैट एयरोप्लेन, अर्जुन मुख्य युद्ध टैंक, और ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली जैसे प्लेटफ़ॉर्मों के विकास को उजागर किया, जिन्हें सभी भारत में बड़े पैमाने पर निर्मित किया जा रहा है। मंत्रालय ने यह भी उल्लेख किया कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने उन्नत प्रौद्योगिकियों को घरेलू स्तर पर उत्पादन करने के उद्देश्य से कई अनुसंधान कार्यक्रमों को तेज़ किया है।

अपने ब्रीफ़िंग में मंत्रालय ने बताया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए रक्षा बजट को घरेलू उत्पादन के विस्तार को समाय

प्रौद्योगिकी स्थानांतरण और संयुक्त विकास

मंत्रालय ने बताया कि भारत ने अमेरिका के साथ उन्नत हथियार प्रणालियों के लिए प्रौद्योगिकी स्थानांतरण को सुगम बनाने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों का उद्देश्य स्वदेशी प्लेटफॉर्म के विकास को गति प्रदान करना और यह सुनिश्चित करना है कि भारत अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का उत्पादन घरेलू स्तर पर कर सके। मंत्रालय ने यह भी उल्लेख किया कि मिसाइल प्रौद्योगिकी, नौसेना प्रणालियों और साइबर-रक्षा जैसे क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान और विकास परियोजनाएँ प्रगति पर हैं।

प्रौद्योगिकी स्थानांतरण के अतिरिक्त, मंत्रालय ने यह भी उल्लेख किया कि अमेरिका ने वायु रक्षा, समुद्री सुरक्षा और विशेष ऑपरेशंस जैसे क्षेत्रों में भारतीय सेनाओं को प्रशिक्षण और समर्थन प्रदान किया है। मंत्रालय ने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य भारतीय सशस्त्र बलों की संचालन तैयारी को बढ़ाना है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए प्रभाव

मंत्रालय का यह विज्ञापन उस समय आया है जब भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक जटिल सुरक्षा वातावरण का सामना करना पड़ रहा है। मंत्रालय ने कहा कि रक्षा उपकरणों के घरेलू उत्पादन में वृद्धि भारत को उभरते खतरों के प्रति अधिक तेजी से प्रतिक्रिया देने और रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने में सक्षम बनाएगी। मंत्रालय ने यह भी नोट किया कि अमेरिका के साथ साझेदारी भारत को अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों और संचालन विशेषज्ञता तक पहुंच प्रदान करेगी।

हालाँकि मंत्रालय ने घरेलू उत्पादन में वृद्धि के बारे में विस्तृत आंकड़े प्रदान नहीं किए, लेकिन उसने कहा कि यह रुझान सकारात्मक है और देश अपने आत्मनिर्भरता लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि रक्षा क्षेत्र सरकार की नीति का एक प्रमुख बिंदु बना रहेगा, जिसमें नवाचार, गुणवत्ता और लागत-प्रभावशीलता पर जोर दिया जाएगा।

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