नई दिल्ली — भारत का रिज़र्व बैंक (RBI) ने 26 सितंबर 2026 को एक बुलेटिन जारी किया, जिसमें देश के वित्तीय और बाह्य क्षेत्रों को लचीला बताया गया, जबकि पश्चिमी एशियाई संघर्ष और अन्य वैश्विक दबावों से उत्पन्न नकारात्मक जोखिमों की चेतावनी भी दी गई। यह वक्तव्य RBI के आर्थिक विश्लेषण विभाग द्वारा जारी किया गया,
बुलेटिन का अगले तिमाही के लिए परिप्रेक्ष्य सतर्क आशावाद पर आधारित रहा। इसने अनुमान लगाया कि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 2026 में 6.2 % की दर से बढ़ेगा, जिसका समर्थन उपभोग और निवेश करेंगे। आरबीआई ने यह भी रेखांकित किया कि बैंकिंग क्षेत्र का पूँजी पर्याप्तता अनुपात (CAR) 14.3 % है, जो नियामक न्यूनतम 10 % से सहज रूप से अधिक है।
वित्तीय बाजार के प्रतिभागियों ने बुलेटिन पर मितभाषी प्रतिक्रिया दी। इक्विटी सूचकांक अपने पूर्व स्तरों से 0.5 % के भीतर बंद हुए, जबकि मानक 10‑वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड 6.45 % पर स्थिर रही। विश्लेषकों ने कहा कि आरबीआई का लचीलापन पर बल वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशक विश्वास को सुदृढ़ कर सकता है।
एक संबंधित विकास में, मौद्रिक नीति के लिए आरबीआई के उपमुख्यगवर्नर डॉ. आर. के. शर्मा ने एक प्रेस ब्रीफ़िंग में कहा कि केंद्रीय बैंक वैश्विक विकासों की करीबी निगरानी जारी रखेगा। “हम बाहरी झटकों के प्रति सतर्क रहेंगे जो भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं,” उन्होंने कहा।
बुलेटिन ने देश के निर्यात क्षेत्र के लिए स्थिर मैक्रो‑पर्यावरण बनाए रखने के महत्व को भी रेखांकित किया। 2026 की पहली छमाही में निर्यात मात्रा 4.8 % बढ़कर ₹2.9 ट्रिलियन हो गई, जो फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों के विकास से प्रेरित थी।