नई दिल्ली — भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शनिवार को घोषणा की कि इसके बोर्ड ने पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं (पीएमएस) और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए वस्तु व्युत्पन्न (कॉमोडिटी डेरिवेटिव्स) में प्रवेश के लिए सुधारों के पैकेज को मंजूरी दी है। 24 सितंबर 2026 को हुई बैठक में लिए गए इन निर्णयों से पीएमएस प्रदाताओं द्वारा ग्राहकों के लिए रखी जा सकने वाली प्रतिभूतियों की श्रेणी विस्तृत होगी और एफपीआई को गैर-कृषि वस्तु भविष्य बाजार (फ्यूचर्स) में व्यापार करने की अनुमति दी जाएगी।
संशोधित पीएमएस ढांचा
नई दिशानिर्देशों के तहत, पोर्टफोलियो प्रबंधक अब ग्राहकों के पोर्टफोलियो में विस्तृत संपत्ति वर्गों, जैसे कि एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ईटीएफ), सूचीबद्ध बुनियादी ढांचे के बॉन्ड और चयनित वैकल्पिक निवेश फंड (एआईएफ) योजनाओं को शामिल कर सकते हैं। ये परिवर्तन 2020 के पीएमएस ढांचे को बदलते हैं, जिसमें प्रबंधकों को केवल इक्विटी, ऋण और एक संकीर्ण सेट व्युत्पन्न (डेरिवेटिव्स) तक सीमित रखा गया था। सेबी ने कहा कि इस संशोधन का उद्देश्य बाजार में भागीदारी को गहरा करना, तरलता में सुधार लाना और भारतीय पीएमएस प्रथाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप करना है।
बोर्ड ने पीएमएस प्रस्तावों के लिए एक स्तरीय संरचना भी पेश की है। उच्च-निवेश-योग्य व्यक्तिगत निवेशकों (हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स) के लिए तैयार ‘वृद्धि’ (एन्हांस्ड) स्तर पर, न्यूनतम निवेश ₹5 करोड़ का होना आवश्यक होगा और जोखिम प्रबंधन की सुरक्षात्मक व्यवस्थाओं के अधीन, प्रबंधकों को ग्राहक के पूंजी के 2.5 गुना तक लीवरेज (उधार लेना) का उपयोग करने की अनुमति होगी। ‘मानक’ (स्टैंडर्ड) स्तर मौजूदा ₹1 करोड़ के न्यूनतम निवेश को बनाए रखता है, लेकिन नई अनुमत संपत्ति वर्गों को जोड़ता है।
एफपीआई को गैर-कृषि वस्तु भविष्य बाजार में प्रवेश
पहले, सेबी के नियमों के तहत एफपीआई को केवल कृषि वस्तु व्युत्पन्न (कॉमोडिटी डेरिवेटिव्स) तक सीमित रखा गया था। नए सुधारों ने यह बाधा हटा दी है, जिससे विदेशी निवेशकों को मान्यता प्राप्त विनिमय केंद्रों (एक्सचेंज) पर धातुओं, ऊर्जा और अन्य गैर-कृषि वस्तुओं के भविष्य बाजार (फ्यूचर्स) में व्यापार करने की अनुमति मिली है। सेबी की अधिसूचना में निर्दिष्ट किया गया है कि एफपीआई को घरेलू भागीदारों पर लागू होने वाले समान स्थिति-सीमा (पोजीशन-लिमिट) और मार्जिन-रखवा (मार्जिन-मेंटेनेंस) आवश्यकताओं का पालन करना होगा।
सेबी के बाजार-आंकड़ों ब्यूलेटिन के अनुसार, 2025-26 वित्त वर्ष में भारत के वस्तु व्युत्पन्न बाजार ने ₹3.2 ट्रिलियन का टर्नओवर दर्ज किया था। इस कदम से भारत के वस्तु व्युत्पन्न बाजार में निवेशक आधार को विस्तार देने की उम्मीद है।
विज्ञापन मानदंडों में शिथिलता
PMS और FPI परिवर्तनों के अतिरिक्त, बोर्ड ने PMS प्रदाताओं के लिए विज्ञापन नियमों में शिथिलता को मंजूरी दी। कंपनियाँ अब डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, जिसमें सोशल‑मीडिया चैनल भी शामिल हैं, का उपयोग करके अपनी सेवाओं का प्रचार कर सकती हैं, बशर्ते वे जोखिम चेतावनियाँ प्रकट करें और SEBI के अनुपालन विभाग से पूर्व अनुमोदन प्राप्त करें। यह संशोधन पूर्व नियम को प्रतिस्थापित करता है, जो विज्ञापन को केवल प्रिंट मीडिया तक सीमित करता था और प्रत्येक अभियान के लिए पूर्व‑अनुमोदन प्रमाणपत्र की आवश्यकता होती थी।
कार्यान्वयन समयरेखा
SEBI ने PMS संस्थाओं के लिए 60‑दिन की अवधि निर्धारित की है, जिसके भीतर उन्हें अपने संचालन समझौतों को नए ढाँचे के अनुरूप बनाना है। मौजूदा PMS अनुबंधों को 30 नवंबर 2026 तक संशोधित करने पर अनुपालन माना जाएगा। गैर‑कृषि वस्तु भविष्य व्यापार करना चाहने वाले FPIs को 15 दिसंबर 2026 तक SEBI के बाजार‑मध्यस्थ विभाग को संशोधित पंजीकरण फॉर्म जमा करना अनिवार्य है।
उद्योग की प्रतिक्रिया
उद्योगिक निकायों ने इन सुधारों का स्वागत किया। भारतीय म्यूचुअल फंड एसोसिएशन (AMFI) ने बताया कि विस्तारित एसेट‑क्लास सूची पोर्टफोलियो प्रबंधकों को खुदरा और संस्थागत ग्राहकों के लिए अधिक विविधीकृत रणनीतियाँ तैयार करने में सक्षम बनाएगी। भारतीय निर्यात संगठनों का महासंघ (FIEO), जो कई विदेशी निवेशकों का प्रतिनिधित्व करता है, ने कहा कि वस्तु डेरिवेटिव
प्राथमिक स्रोत एवं आधिकारिक दस्तावेज़
- SEBI Clears New PMS Rules, Expands Investment Options
- SEBI clears new PMS rules, expands investment options for portfolio managers and FPIs – In
- SEBI board clears a number of reforms; expands FPI access to commodity derivatives, relaxe
- Sebi revamps PMS rules, allows FPIs in non-agri derivatives – The New Indian Express