नई दिल्ली — 24 सितंबर 2026 को प्रकाशित एक बिज़नेस स्टैंडर्ड राय कॉलम के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को अक्टूबर 2026 की मौद्रिक नीति बैठक में अपनी नीति स्थिति में बदलाव करने के लिए बाध्य होना पड़ सकता है। इस कॉलम में उल्लेख किया गया है कि शीर्ष स्तर की महंगाई (हेडलाइन इनफ्लेशन) कई महीनों से RBI के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है और वैश्विक विकास में 둔ाव के बाद बाहरी वित्तपोषण की स्थितियां कठोर हो गई हैं।
महंगाई का रुझान और नीतिगत आउटलुक
लेखक ने नवीनतम उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) डेटा की ओर संकेत किया है, जिसमें अगस्त में पिछले वर्ष की तुलना में 5.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो जुलाई में दर्ज 5.0 प्रतिशत से थोड़ी अधिक है। कॉलम में तर्क दिया गया है कि RBI की वर्तमान रेपो दर 6.50 प्रतिशत अब महंगाई की अपेक्षाओं को स्थिर रखने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती, विशेषकर तब जब कई राज्यों में खाद्य पदार्थों की कीमतों में अस्थिरता जारी है।
वित्तीय और बाहरी विचार
संभावित नीति विकल्प
इस स्तम्भ में अक्टूबर में आरबीआई के लिए दो संभावित कदमों का वर्णन किया गया है: 6.75 प्रतिशत तक 25‑आधार अंक की मामूली वृद्धि, या दरों को स्थिर रखने का निर्णय, साथ ही यह संकेत कि यदि मुद्रास्फीति में राहत नहीं मिलती तो आगे कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार हैं। लेखक चेतावनी देते हैं कि दरों को स्थिर रखना मूल्य दबावों के प्रति सहिष्णुता के रूप में व्याख्यायित किया जा सकता है, जिससे आरबीआई की विश्वसनीयता कमजोर हो सकती है।
बाजार की प्रतिक्रिया
स्तम्भ के प्रकाशन के बाद, बीएसई सेंसेक्स 0.4 प्रतिशत गिरा, जबकि निफ्टी 50 प्रारम्भिक व्यापार में 0.5 प्रतिशत नीचे गया। लेख में उद्धृत विश्लेषकों ने कहा कि बाजार अक्टूबर की बैठक में 30‑आधार अंक की वृद्धि को मूल्यांकित कर रहा है, जो आरबीआई की अगली चाल के प्रति बढ़ी हुई अनिश्चितता को दर्शाता है।