तेहरान — सोमवार को तेहरान के एक न्यायालय ने गायिका परस्तू अहमदी के खिलाफ 74 जेल्लों की सजा की पुष्टि की, जिन्हें बिना हिजाब पहने एक संगीत समारोह में प्रस्तुति देने के लिए दोषी ठहराया गया था। यह फैसला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींच रहा है, क्योंकि यह ईरान द्वारा महिलाओं के लिए अनिवार्य पोशाक के नियमों के प्रवर्तन को दर्शाता है।
32 वर्षीय अहमदी, जो अपने पॉप-फ्यूजन शैली के लिए जानी जाती हैं, जून 2025 में तेहरान में एक लाइव प्रस्तुति के दौरान जब उन्होंने अपना हेडस्कारफ हटाया, तब गिरफ्तार की गई थी। यह मामला इस्लामिक रेवोल्यूशनरी कोर्ट के सामने पेश किया गया, जिसने ईरानी दंड संहिता की धारा 638 के तहत उन्हें “बिना पारदे के महिला शरीर को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने” के दोषी पाया। इस अपराध के लिए अधिकतम 120 जेल्लों की सजा का प्रावधान है।
कानूनी पृष्ठभूमि
ईरान के नैतिकता कानूनों का हिस्सा बनने वाली धारा 638, सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब हटाने को अपराध मानती है। इस कानून का प्रयोग फैशन डिजाइनर्स से लेकर सोशल मीडिया प्रभावकों तक विभिन्न मामलों में किया गया है। वर्ष 2024 में, सर्वोच्च न्यायालय ने एक टेलीविजन प्रस्तोता के खिलाफ 60 जेल्लों की सजा की पुष्टि की थी, जिन्होंने बिना पारदे के प्रस्तुति दी थी, जिसने वर्तमान मामले के लिए एक मिसाल कायम की थी।
न्यायालय द्वारा 27 सितंबर 2026 को जारी किए गए इस फैसले में, जुलाई 2025 में मूल रूप से लगाई गई 74 जेल्लों की सजा की पुनः पुष्टि की गई। न्यायाधीश ने सजा की गंभीरता के कारकों के रूप में गायिका की सार्वजनिक प्रभावशाली स्थिति और “अधिनता न मानने का प्रसार करने की संभावना” का हवाला दिया। न्यायालय के प्रवक्ता द्वारा जारी किए गए एक संक्षिप्त विज्ञप्ति में इस फैसले की घोषणा की गई, जिसमें कहा गया कि यह निर्णय “कानून और न्यायालय के पूर्व निर्णयों के अनुरूप” है।
अपील और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
अहमदी के कानूनी टीम ने तेहरान के अपील न्यायालय में अपील दाखिल की, जिसमें तर्क दिया गया कि सजा अनुपातहीन है और गायिका का इरादा कानून का उल्लंघन करने का नहीं था। 20 सितंबर 2026 को अपील खारिज कर दी गई, जिसमें अपील न्यायालय ने मूल निर्णय को “कानूनी प्रावधानों के अनुरूप” बताया।
अमेनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच सहित मानवाधिकार संगठनों ने जेल्लों को क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक सजा के रूप में आलोचना की है। इन संगठनों ने न्यायालय के फैसले की निंदा करते हुए विज्ञप्ति जारी की और ईरानी दंड संहिता से शारीरिक सजा के प्रावधान को हटाने की मांग की।
संगीत समुदाय पर प्रभाव
ईरान के संगीत मंच के भीतर, इस मामले ने कलात्मक स्वतंत्रता और नैतिक कोड के प्रवर्तन पर चर्चा को जन्म दिया है। कई कलाकारों ने विज्ञप्ति जारी कर चिंता व्यक्त की है कि यह फैसला रचनात्मक अभिव्यक्ति को दबाने का कारण बन सकता है। तेहरान स्थित बैंड “सफ्रन बीट्स” के नेतृत्व में संगीतकारों की एक समूह ने 24 सितंबर को संस्कृति मंत्रालय के बाहर मौन प्रदर्शन किया, जिसमें प्रस्तुतकर्ताओं के संदर्भ में कानून के प्रयोग की समीक्षा की मांग की गई।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, इस मामले ने पश्चिमी मीडिया का ध्यान आकर्षित किया है। बीबीसी ने न्यायालय के निर्णय पर रिपोर्ट की, यह बताते हुए कि 74 थप्पड़ “हाल के वर्षों में एक गैर‑हिंसक अपराध के लिए सबसे कठोर दंड” था। जेरूसलम पोस्ट ने इस मामले को ईरान में “वस्त्र नियमों के सख्त प्रव