नई दिल्ली — प्रेस सूचना ब्यूरो ने 27 सितंबर 2026 को एक तथ्य‑पत्र जारी किया, जिसमें भारत की आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग निर्माण में प्रगति को दर्शाया गया है। दस्तावेज़ में कई मील के पत्थर सूचीबद्ध हैं, जिनमें विमान, मिसाइल और नौसैनिक प्लेटफ़ॉर्म का घरेलू उत्पादन बढ़ाना शामिल है, तथा इन उपलब्धियों को प्राप्त करने में सार्वजनिक‑निजी भागीदारी की भूमिका को उजागर किया गया है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि भारत की रक्षा खरीद अब स्वदेशी घटकों का अधिक हिस्सा शामिल करती है, जिसे मंत्रालय राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रमुख स्तंभ के रूप में वर्णित करता है।
घरेलू उत्पादन लाभ
तथ्य‑पत्र के अनुसार, रक्षा उत्पादन बोर्ड ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं के विस्तार की देखरेख की है। लाइट कॉम्बैट एयरोनॉट (एलसीए) तेजस का उत्पादन बेंगलुरु में नई असेंबली लाइन तक विस्तारित किया गया है, जबकि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने अग्नि‑V मिसाइल के मार्गदर्शन प्रणाली की
गोर के बयान की रिपोर्ट इंडियन आवाज़ और डिफेंस.इन ने प्रकाशित की थी, जिनमें दोनों ने उल्लेख किया कि इस अभ्यास में लाइव-फायर ड्रिल और संयुक्त कमांड एंड कंट्रोल सिमुलेशन शामिल थे। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने पहले भी ऐसे अभ्यासों के क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और समुद्री खतरों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने पर जोर दिया है।
भविष्य की दृष्टि
रक्षा मंत्रालय ने अगले पांच वर्षों के लिए एक रोडमैप तैयार किया है, जिसका लक्ष्य कुल रक्षा व्यय में घरेलू उत्पाद का हिस्सा 80 प्रतिशत तक बढ़ाना है। इस योजना में अगली पीढ़ी के नौसेना फ्रिगेट्स, एक नई पीढ़ी के अमान्युक्त विमानों (ड्रोन) का विकास और एकीकृत रक्षा लॉजिस्टिक्स प्रणाली का विस्तार शामिल है। तथ्य पत्रिका (फैक्ट शीट) में रक्षा नवाचार निधि की स्थापना का भी उल्लेख किया गया है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी उन्नत तकनीकों पर काम कर रहे स्टार्ट-अप्स को बीज पूंजी (सीड कैपिटल) प्रदान करेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाव रणनीतिक स्वायत्तता और आर्थिक विचारों दोनों से प्रेरित है। रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में कुछ हथियार प्रणालियों के आयात की लागत में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि घरेलू उत्पाद को पैमाने की अर्थव्यवस्था (इकोनॉमी ऑफ स्केल) और कम हो रहे निर्माण समय (लीड टाइम) से लाभ हुआ है।
भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति के व्यापक संदर्भ में, तथ्य पत्रिका पर जोर दिया गया है कि आत्मनिर्भरता विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता को कम करती है और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के प्रति सहनशीलता को बढ़ाती है। मंत्रालय ने रक्षा खरीद प्रक्रिया (डीपीपी) में सुधारों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला है, जिसका उद्देश्य अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल बनाना और प्रशासनिक विलंब को कम करना है।