अमरावती — रविवार को विदेश मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल) में भारतीय नौसेना की पहली स्वदेशी फ्लीट सपोर्ट शिप ‘सूर्या’ के लॉन्च का उद्घाटन किया। इस समारोह में वरिष्ठ नौसेना अधिकारियों और राज्य के उच्च पदस्थ अधिकारियों ने भाग लिया, जिसमें इस जहाज की भूमिका पर प्रकाश डाला गया, जो कि तट से दूर कार्यरत युद्ध जहाजों को लॉजिस्टिकल सहायता प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण है।
‘सूर्या’, जिसे एफएसएस-1 के रूप में निर्धारित किया गया है, एक नियोजित श्रृंखला की पहली जहाज है, जिसे पूरी तरह से भारत में निर्मित किया जाएगा। हाल ही में अपने स्लिपवे को बड़े हल्स (जहाजों की धार) को समायोजित करने के लिए अपग्रेड करने वाले इस शिपयार्ड ने रक्षा मंत्रालय के स्वदेशी जहाज निर्माण कार्यक्रम द्वारा निर्धारित समय-सीमा से पहले इस लॉन्च को पूरा किया है।
रणनीतिक महत्व
नौसेना की संचालनात्मक नीति अब अधिक से अधिक स्थायी ब्लू-वॉटर उपस्थिति पर निर्भर करती है। ‘सूर्या’ जैसे फ्लीट सपोर्ट जहाज समुद्र में युद्ध जहाजों को ईंधन, ताज़ा पानी, आपूर्ति और सीमित मरम्मत सुविधाएँ प्रदान करते हैं, जिससे विदेशी झंडे वाले रिप्लेनिशमेंट जहाजों की आवश्यकता कम हो जाती है। रक्षा अधिकारियों ने कहा कि स्वदेशी निर्मित सहायक जहाज के शामिल होने से लॉजिस्टिकल आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलती है और यह रक्षा उपकरणों के लिए ‘मेक इन इंडिया’ एजेंडा के अनुरूप है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, एफएसएस कार्यक्रम का लक्ष्य 2030 तक तीन जहाजों को कमीशन करना है, जिनमें से प्रत्येक पोर्ट कॉल के बिना 30 दिनों तक कैरियर बैटल ग्रुप का समर्थन करने में सक्षम होगा। ‘सूर्या’ का लॉन्च इस लक्ष्य की ओर迈ने का पहला कदम है।
तकनीकी अवलोकन
हालाँकि विस्तृत विनिर्देश वर्गीकृत (क्लासिफाइड) हैं, अधिकारियों ने ‘सूर्या’ को लगभग 10,000 टन विस्थापन क्षमता वाला एक बहु-भूमिका सहायक जहाज बताया है। इस जहाज में आधुनिक कार्गो हैंडलिंग सिस्टम, एक मेडिकल बे और मध्यम आकार के हेलीकॉप्टरों को संचालित करने में सक्षम फ्लाइट डेक की सुविधा है। इसका प्रोपल्शन सिस्टम डीजल-इलेक्ट्रिक कॉन्फिगरेशन से संचालित होता है, जिसे विस्तृत मिशन के दौरान ईंधन दक्षता के लिए डिज़ाइन किया गया है।
एचएसएल के अधिकारियों ने उल्लेख किया कि इस जहाज में देशी स्टील, प्रोपल्शन घटक और नेविगेशन उपकरणों का उपयोग किया गया है, जिससे आयात पर निर्भरता में कमी आई है। लॉन्चिंग के साथ-साथ उद्घाटन की गई अपग्रेडेड स्लिपवे अब 150 मीटर तक की लंबाई वाले हल्स (जहाज के शरीर) को समायोजित कर सकती है, जिससे नौसैनिक अड्डे की भविष्य के युद्धपोत परियोजनाओं के लिए क्षमता में वृद्धि होगी।
राजनीतिक और औद्योगिक संदर्भ
राजनाथ सिंह ने इस लॉन्चिंग को भारत की बढ़ती रक्षा निर्माण क्षमता का प्रमाण बताया। उन्होंने उपस्थित भीड़ को संबोधित करते हुए कहा, “सूर्या की कमीशनिंग हमारे संकल्प को दर्शाती है कि हम महत्वपूर्ण समुद्री संपदाओं को देश में ही विकसित करेंगे।” मंत्री ने यह भी जोड़ा कि यह परियोजना देश भर में कुशल रोजगार सृजन और सहायक उद्योगों को प्रोत्साहित करती है।
यह कार्यक्रम तब आयोजित किया गया है जब सरकार सशस्त्र बलों के सभी विभागों में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। पिछले एक वर्ष में, नौसेना ने दो स्वदेशी विनाशकों और एक स्टील्थ फ्रिगेट को कमीशन किया है, जिन्हें सभी देशी अड्डों पर निर्मित किया गया था। रक्षा विश्लेषक सूर्या की लॉन्चिंग को उसी दिशा में एक तार्किक विस्तार मानते हैं।
भविष्य की दृष्टि
नौसेना के नियोजकों का अनुमान है कि समुद्री परीक्षण और क्रू प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद, सूर्या अगले छह महीनों में पूर्वी नौसेना कमांड की लॉजिस्टिक्स फ्लीट का हिस्सा बनेगी। जहाज प्रारंभिक रूप से बंगाल की खाड़ी में संचालित होगा, जहाँ यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कैरियर और सतह लड़ाकू जहाजों के परिचालन का समर्थन करेगा।
उद्योग प्रेक्षियों का कहना है कि सफल लॉन्चिंग के साथ, उसी स्वदेशीकरण ढांचे के तहत बड़े सहायक जहाजों, जिसमें फ्लीट रिप्लेनिशमेंट ऑयलर्स और अस्पताल जहाज शामिल हैं, के निर्माण का रास्ता खुल सकता है।
प्राथमिक स्रोत एवं आधिकारिक दस्तावेज़
- Rajnath Singh launches Navy’s first indigenous fleet support ship ‘Surya’ at Visakhapatnam
- Rajnath Singh launches first Navy support ship in Visakhapatnam – India Today
- Rajnath Singh to launch first fleet support ship, inaugurate upgraded slipway in Visakhapa
- Rajnath Singh to Launch India’s First Fleet Support Ship (FSS-1) – utkarsh.com