नई दिल्ली — जीई एरोस्पेस ने सितंबर 2026 में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को चार F404-IN20 टर्बोफैन इंजन सौंपे, जो हल्का लड़ाकू विमान (LCA) तेजस Mk-1A कार्यक्रम के लिए तैयार किए गए हैं। यह नवीनतम बैच जीई और HAL के बीच संयुक्त विकास समझौते के तहत निर्धारित आपूर्ति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारतीय वायु सेना के फ्लीट विस्तार को बनाए रखना है।
कंपनी के लॉजिस्टिक्स रिपोर्ट के अनुसार, तेजस Mk-1A के लिए कुल 120 पावरप्लांट की आपूर्ति के लिए बनाए गए व्यापक खरीदारी योजना का हिस्सा होने वाले इन चार इंजनों को 12 सितंबर को HAL के बेंगलुरु स्थित संयंत्र में हस्तांतरित किया गया। जीई एरोस्पेस ने पुष्टि की है कि ये इंजन विमान के अपग्रेडेड एवियोनिक्स और हथियारों के सूट के लिए आवश्यक प्रदर्शन विशिष्टताओं को पूरा करते हैं।
तेजस इंजन कार्यक्रम का पृष्ठभूमि
भारत का तेजस LCA, जिसे पुराने लड़ाकू विमानों को बदलने के लिए डिज़ाइन किया गया है, GE-व्युत्पन्न F404-IN20 इंजन पर निर्भर करता है, जिसे HAL द्वारा बेंगलुरु स्थित इंजन निर्माण इकाई में लाइसेंस के तहत उत्पादित किया जाता है। यह इंजन 78 kN का थ्रस्ट प्रदान करता है और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता को कम करने के लिए स्वदेशी घटकों को शामिल करता है। HAL ने 2030 तक भारतीय वायु सेना के 120 विमानों के लक्ष्य को पूरा करने के लिए उत्पादन क्षमता को बढ़ाना शुरू कर दिया है।
इस वर्ष की शुरुआत में, रक्षा मंत्रालय ने अगले विमान डिलीवरी ट्रांश के लिए 30 इंजनों के लिए एक अतिरिक्त ऑर्डर को मंजूरी दी थी। सितंबर की यह शिपमेंट उस ऑर्डर का पहला बैच है, जो 2026-27 वित्तीय वर्ष के लिए HAL के उत्पादन शेड्यूल के अनुरूप है।
जीई एरोस्पेस का प्रतिबद्धता
जीई एरोस्पेस ने कहा कि यह डिलीवरी भारत के रक्षा क्षेत्र के साथ इसके दीर्घकालिक साझेदारी और स्वदेशी प्लेटफॉर्म को समर्थन देने के प्रति उसके प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। कंपनी ने उल्लेख किया कि F404-IN20 इंजन 2016 से भारतीय वायु सेना की सेवा में है और ईंधन दक्षता और थ्रस्ट-टू-वेट अनुपात में सुधार करने के लिए चल रहे अपग्रेड को शामिल किया जा रहा है।
उद्योग विश्लेषकों का कहना है कि समय पर इंजन की डिलीवरी तेज़ जेट उत्पादन लाइन को बनाए रखने के लिए अत्यावश्यक है, जिसे अतीत में आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं के कारण विलंब का सामना करना पड़ा है। सितंबर की शिपमेंट से HAL को 2027 के अंत तक भारतीय वायु सेना को 12 विमानों की नियोजित डिलीवरी पर बनाए रखने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
रक्षा स्वावलंबन पर प्रभाव
यह डिलीवरी सरकार की “मेक इन इंडिया” पहल के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य रक्षा उपकरणों में घरेलू सामग्री का अनुपात बढ़ाना है। लाइसेंस के तहत इंजन प्राप्त कर और भारतीय निर्मित घटकों को एकीकृत कर, तेज़ जेट कार्यक्रम आयातित पावरप्लांट पर निर्भरता घटाने और रणनीतिक स्वायत्तता को सुदृढ़ करने का लक्ष्य रखता है।
HAL के मुख्य कार्यकारी ने हाल ही में एक ब्रीफिंग में बताया कि इंजन बैच को एयरफ्रेम में स्थापित करने से पहले एक श्रृंखला के ग्राउंड‑रन परीक्षणों से गुजरना होगा। सफल एकीकरण से भारतीय वायु सेना को इस वर्ष के अंत में Mk‑1A संस्करण के परिचालन परीक्षण शुरू करने में सक्षम बनाया जाएगा।
GE एयरोस्पेस की आपूर्ति श्रृंखला, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत में विनिर्माण सुविधाएँ शामिल हैं, रक्षा प्रोक्योरमेंट प्रोसिजर (DPP) 2022 के अनुरूप सुनिश्चित करने के लिए रक्षा मंत्रालय के प्रोक्योरमेंट सेल के साथ समन्वित की गई है। शिपमेंट को रक्षा आयात निर्यात नीति के तहत कस्टम्स से मंजूरी मिली, और कोई रिपोर्टेड समस्या नहीं पाई गई।
प्राथमिक स्रोत एवं आधिकारिक दस्तावेज़
- ‘Focused on delivering engines needed to power India’s Tejas’: GE Aerospace ships 4 F404 e
- “Focused on delivering engines needed to power India’s Tejas”: GE Aerospace ships 4 more F
- GE Aerospace to ship 4 engines for Tejas LCA – The Hindu
- “Focused on delivering engines needed to power India’s Tejas”: GE Aerospace ships 4 more F