नई दिल्ली — 7 अक्टूबर 2026 को भारत के विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) द्वारा की गई टिप्पणियों की निंदा की, जिसमें कहा गया कि वह ब्लॉक आतंकवाद के शिकार और जम्मू और कश्मीर में इसे अंजाम देने वालों के बीच अंतर नहीं कर सकता।
OIC का संयुक्त राष्ट्र में बयान
OIC ने अपने स्थायी प्रतिनिधि के माध्यम से कहा कि भारत विवादित क्षेत्र में मानवाधिकार उल्लंघन जारी रखता है और अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की। ये टिप्पणियाँ जम्मू और कश्मीर की स्थिति पर बहस के दौरान की गई थीं, जो विषय दशकों से संयुक्त राष्ट्र की चर्चाओं में रहा है।
भारत का औपचारिक उत्तर
भारत के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया कि OIC के टिप्पणियाँ “भ्रामक” थीं और सीमा पार आतंकवाद में फँसे नागरिकों के कष्टों को अनदेखा करती हैं। मंत्रालय ने ज़ोर दिया कि भारत ने लगातार आतंकवाद की निंदा की है और OIC की कथा शिकार और अपराधियों के बीच की रेखा को धुंधला करती है।
उसी बयान में, मंत्रालय ने दोहराया कि जम्मू और कश्मीर भारत गणराज्य का अभिन्न हिस्सा है और किसी भी बाहरी टिप्पणी को देश की संप्रभुता तथा 2019 के संविधान संशोधन के परिणामों का सम्मान करना चाहिए, जिसने राज्य का पुनर्ग
हाल ही में जारी संयुक्त राष्ट्र के रिपोर्टों ने सीमा पार घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों के मामलों पर प्रकाश डाला है, जिसके परिणामस्वरूप भारत ने नियंत्रण रेखा (LoC) के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा किया है। ओआईसी (OIC) के संयुक्त राष्ट्र में हस्तक्षेप से इस ब्लॉक के उस व्यापक पैटर्न का पता चलता है, जिसमें वे सदस्य देशों में मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाते हैं, जो अक्सर कश्मीर पर पाकिस्तान की स्थिति के अनुरूप होते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ
कई संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों ने शांति की अपील की और भारत तथा पाकिस्तान दोनों से संवाद में शामिल होने की सलाह दी। सत्र के दौरान कोई अन्य देश ने ओआईसी के उस दावे का सार्वजनिक समर्थन नहीं किया, जिसमें भारत को आतंकवाद का प्रवर्तक बताया गया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि ओआईसी के बयान का उद्देश्य संभवतः क्षेत्र के प्रबंधन के संबंध में भारत पर दबाव बनाना है, लेकिन भारत की दृढ़ प्रतिक्रिया इस बात का संकेत देती है कि वह बहुपक्षीय मंचों पर अपनी बात को बचाने के लिए तैयार है।
प्रभाव
यह विनिमय कश्मीर पर जारी कूटनीतिक तनाव और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के उस भूमिका को उजागर करता है, जो इस विषय पर चर्चा को आकार देते हैं। भारत की प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि वह किसी भी ऐसे चित्रण का विरोध करेगा, जो उसके सुरक्षा कार्यों को आतंकवाद के समतुल्य मानता है, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र जैसे प्रमुख मंचों पर।
प्राथमिक स्रोत एवं आधिकारिक दस्तावेज़
- Unable to distinguish between victim and perpetrator: India slams OIC remarks at UN
- ‘Unable to distinguish between victim & perpetrator’: India tears into OIC over J&K remark
- Unable To Distinguish Between Victim And Perpetrator: India Slams OIC Remarks At UN – Dail
- India rebukes OIC at UN, says group cannot distinguish between victim and terror perpetrat