नई दिल्ली — वायु सेना के अगले प्रमुख (प्रधान वायु सेना प्रमुख) के पद के लिए एयर मार्शल आशुतोष द्विवेदी का चयन किया गया है। 7 अक्टूबर, 2026 को घोषित किए गए इस नियुक्ति को 31 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी माना जाएगा, जिस दिन वे एयर चीफ मार्शल विवेक राम चौधरी का स्थान संभालेंगे।
1985 बैच के नेशनल डिफेंस अकादमी (NDA) के स्नातक द्विवेदी ने सेवा में चार दशकों से अधिक का समय बिताया है। उनका सबसे हालिया पद केंद्रीय वायु सेना कमांड के प्रमुख (एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ) का था, जिसे उन्होंने 2024 में संभाला था। उनके पूर्ववर्ती पदों में वायु सेना मुख्यालय में वरिष्ठ स्टाफ पद, एक अग्रिम रेखा के लड़ाकू स्क्वाड्रन का कमांडर पद और भारतीय वायु सेना की रणनीतिक योजना विभाग का नेतृत्व शामिल है।
संचालनात्मक अनुभव
इस अधिकारी के संचालनात्मक रिकॉर्ड में 1999 के कारगिल संघर्ष के दौरान ऑपरेशन सफेद सागर में भागीदारी और ऑपरेशन सिंदूर में शामिल होने का उल्लेख है, जो 2022 में क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित एक संयुक्त भारतीय-पाकिस्तानी वायु अभ्यास था। वायु संचालन निदेशक के रूप में अपनी सेवा के दौरान, उन्होंने स्वदेशी HAL तेजस Mk-1A लड़ाकू विमान के अग्रिम रेखा सेवा में समावेश की देखरेख भी की थी।
रणनीतिक संदर्भ
यह नियुक्ति तब आ रही है जब भारतीय वायु सेना स्वदेशी डिटर्रेन्स (विरोध) पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है। सेवा एक बहु-वर्षीय आधुनिकीकरण योजना के मध्य में है, जिसमें लड़ाकू विमानों, अमान्यत (unmanned) प्लेटफॉर्मों और वायु रक्षा प्रणालियों के घरेलू उत्पादन पर जोर दिया गया है। 2025-26 के बजट में, रक्षा मंत्रालय ने स्वदेशी अंतरिक्ष-वायु (aerospace) परियोजनाओं के लिए 1.45 ट्रिलियन रुपये आवंटित किए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।
विश्लेषकों का कहना है कि द्विवेदी का संचालनात्मक कमांड और खरीदारी (procurement) में पृष्ठभूमि सरकार के रक्षा क्षेत्र के लिए ‘मेक इन इंडिया’ अभियान से मेल खाती है। वायु सेना प्रमुख के रूप में, वे एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम के कार्यान्वयन की देखरेख करेंगे, जिसकी पहली उड़ान 2028 में निर्धारित है, और स्वदेशी अकाश-II सतह-से-वायु मिसाइल के भारतीय वायु सेना के स्क्वाड्रनों में एकीकरण की निगरानी करेंगे।
संक्रमण और उत्तराधिकार
एयर चीफ मार्शल चौधरी, जो 31 अक्टूबर, 2026 को सेवानिवृत्त होंगे, ने राफेल फ्लीट के अधिग्रहण और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में वायु आधार नेटवर्क के विस्तार के दौरान भारतीय वायु सेना का नेतृत्व किया था। रक्षा मंत्रालय के विज्ञापन में संकेत दिया गया कि संक्रमण “म끄द और व्यवस्थित” होगा, और द्विवेदी से अपेक्षा की जा रही है कि वे चल रही परियोजनाओं में निरंतरता बनाए रखते हुए पायलट प्रशिक्षण और रखरखाव प्रोटोकॉल में सुधार लाने का प्रयास करेंगे।
दिक्षित की वरिष्ठता सूची उन्हें पश्चिमी, पूर्वी और दक्षिणी वायु कमांड के प्रमुखों सहित कई अन्य वरिष्ठ वायु मार्शलों से आगे रखती है। चयन प्रक्रिया, जिसे मंत्रिमंडल के नियुक्ति समिति द्वारा देखरेख की जाती है, सेवा रिकॉर्ड, परिचालन उपलब्धियाँ और रणनीतिक दृष्टिकोण के मूल्यांकन के मानक प्रोटोकॉल का पालन करती है।
रक्षा नीति पर प्रभाव
चीन की बढ़ती वायु क्षमताओं और वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ बढ़ती तनाव के मद्देनज़र, नए प्रमुख का कार्यादेश हिमालयी थिएटर में वायु रक्षा तत्परता को सुदृढ़ करना शामिल है। अमेरिकी और फ्रांसीसी के साथ भारतीय वायु सेना के हालिया अभ्यासों ने इंटरऑपरेबल प्लेटफार्मों की आवश्यकता को उजागर किया है, जिसे दिक्षित से अपेक्षा की जाती है कि वे आगे बढ़ाएँ।
परिचालन तत्परता के अलावा, यह नियुक्ति सरकार के आत्मनिर्भरता पर जोर को रेखांकित करती है। रक्षा उत्पादन नीति 2025, जिसका लक्ष्य 2030 तक प्रमुख प्लेटफार्मों में 70 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री प्राप्त करना है, आने वाले प्रमुख के लिए एक प्रमुख प्रदर्शन मापदंड होगी।
व्यक्तिगत प्रोफ़ाइल
अशुतोष दिक्षित उत्तर प्रदेश से हैं और रक्षा सेवाओं के स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन से रक्षा अध्ययन में मास्टर्स डिग्री रखते हैं। वे 3,500 घंटे से अधिक के उड़ान समय के साथ एक योग्य लड़ाकू पायलट हैं, जिनमें मिग‑21, मिग‑29 और सू‑